<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" ?> 


<rss version="2.0">

	<channel>
		<title>&#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; &#2342;&#2375;&#2357;&#2344;&#2366;&#2327;&#2352;&#2368; :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2369;&#2352;&#2368; &#2360;&#2366;&#2361;&#2367;&#2340;&#2381;&#2351; &#2360;&#2306;&#2327;&#2381;&#2352;&#2361; - Content Channel</title>
		<link>http://www.bhojpatra.net</link>
		<description>&#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; &#2342;&#2375;&#2357;&#2344;&#2366;&#2327;&#2352;&#2368; : &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2369;&#2352;&#2368; &#2360;&#2366;&#2361;&#2367;&#2340;&#2381;&#2351; &#2360;&#2306;&#2327;&#2381;&#2352;&#2361; : BhojPATRA Devanagri :: An Online Database of Bhojpuri Articles</description>
				
	<image>
		<title>BhojPATRA Devangari Bhojpuri Collection</title>
		<url>http://www.bhojpatra.net/bhojpatra.gif</url>
		<link>http://www.bhojpatra.net</link>
	</image>
<item><title>करम</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=146</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: ravi raj&lt;hr&gt;मेहनत करि फल के चिन्ता मत करि.&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;रबिकान्त तेजपुरवा ९९५३०३९३५०</description><pubDate>Fri, 26 Jun 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title> परभु कृष्णा के भजन</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=145</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Anand Dubey&lt;hr&gt; नन्द नगारि के राजकुमार, किषना जैसन केहु ना बा, हो  कइलन गौवाल बाल सनग लीला हजार, वैसन केहु ना बा २&lt;br&gt;&lt;br&gt;शयाम वरन, घुघराले बाल.. , नटखट, मनमोहक उनकर चाल, सारा जगत के राखेलेन खयाल, वैसन केहु ना बा, वैसन केहु ना बा.. ननद नगरि के राजकुमार, किषना जैसन केहु ना बा,&lt;br&gt;&lt;br&gt;राधा जी के पऋयतम हउवन..., रुकमीन जी के जान..., मीरा जी के लागल शयामा से धयान...।&lt;br&gt;सुरदास कयीलन गजबे बखान..., माखन चोर नटखट घनशयाम..., जिनकर लिला बावे ापरमपार।।&lt;br&gt;ारेह, ननद नगारि के राजकुमार, किषना जैसन केहु ना बा, हो  कइलन गौवाल बाल सनग लीला हजार, वैसन केहु ना बा २&lt;br&gt;&lt;br&gt;जब २ धरती पर बडल ातयाचार, सनतन के जियल कइले राखचस दुशवार,लीलाधर लेलेनी ाौतार,&lt;br&gt;दुषटन के करि ले सनहार, सनतन पर करीले, कऋपा बारेबार,वइसन केहु ना बा, वइसन केहु ना बा।&lt;br&gt;ारेह, ननद नगारि के राजकुमार, किषना जैसन केहु ना बा, हो  कइलन गौवाल बाल सनग लीला हजार, वैसन केहु ना बा २&lt;br&gt;&lt;br&gt;सानचे कहिले भइया करिह विशवास, कऋषना लगइहन भवसागर पार, पऋत के सागर हउवन,ामरीत के खान, भकत वतसल, शऋ हरि के अवतार, ऊनके शरण मे होइ सबकर उधार, वइसन केहु ना बा, वइसन केहु ना बा।।  ननद नगारि के राजकुमार, किषना जैसन केहु ना बा, हो  कइलन गौवाल बाल सनग लीला हजार, वैसन केहु ना बा २&lt;br&gt; &lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>Fri, 26 Jun 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>हमरा चान लागे लू</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=140</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Hridaya Narayan Singh&lt;hr&gt;तू देख जनि चान, हमरा चान लागे लू।&lt;br&gt;मचा देबू कहियो तूफान लागे लू।&lt;br&gt;&lt;br&gt;मत करिह सिंगार, मिली ओरहन हजार&lt;br&gt;तोहके देखे खातिर मेला में हो जायी मार&lt;br&gt;रूप के तू बड़हन दुकान लागे लू।&lt;br&gt;&lt;br&gt;केहू आपन दौलत करेला निछावुर&lt;br&gt;सुध-बुध केहू खो के बनि जाना बाउर&lt;br&gt;तूर देबू सबकर गुमान लागू लू।&lt;br&gt;&lt;br&gt;हंसि हंसि के जन आज बिजुरी गिराव&lt;br&gt;अभिज्ञात जी के जनि पागल बनाव&lt;br&gt;अंगड़ाई ले लू कमान लागे लू।</description><pubDate>Wed, 15 Apr 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>तु साँझ के रंग में आवेलु</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=138</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Ajit Tiwari&lt;hr&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;हमरा मनवा के भावेलु&lt;br&gt;कबो पायल बजावत&lt;br&gt;कबो चूड़ी खनकावत&lt;br&gt;धीरे-धीरे..आहिस्ता-आहिस्ता&lt;br&gt;हमरा जीयरा में समायेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;तु चैन-सुकून बनके आवेलु&lt;br&gt;प्रितिया के आँचर ओढ़ावेलु&lt;br&gt;हम दिन भर के काम से रहिले थाकल&lt;br&gt;तोहरा अँचरा के पाके हो जाईले पागल&lt;br&gt;सुतल रही चाहे रहिले जागल&lt;br&gt;तु प्रेम के अमृत बरसावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;कबो हिरनी बनके आवेलु&lt;br&gt;हमरा अंखिया में बस जायेलु&lt;br&gt;बलखात चलेलु.... इठ्लात चलेलु&lt;br&gt;मंद-मंद मुस्कात चलेलु&lt;br&gt;कांच-कपोल से.. प्यार के बोल से&lt;br&gt;करेजवा पर तीर चलावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;कबो कोईल बनके आवेलु&lt;br&gt;प्रीत के गीत सुनावेलु&lt;br&gt;तोहरा बोलीया में मिसीरी घुलल बा&lt;br&gt;तोहरा बिना मुस्किल जीयल बा&lt;br&gt;प्यार के मीठ गीतिया से&lt;br&gt;जिनगी भर के प्यास बुझावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;तु मोरीनी बनके आवेलु&lt;br&gt;अखियन से नींद चुरावेलु&lt;br&gt;खुदे बरसेलु बादल बनके&lt;br&gt;खुदे गीरेलु बिजुरी बनके&lt;br&gt;जीयरा में अगीया लगावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;कबो बेली बनके आवेलु&lt;br&gt;कबो चमेली बनके आवेलु&lt;br&gt;खुशुबू के बगईचा बनके&lt;br&gt;कोमलता से छुवेलु हमके&lt;br&gt;मनवा के कोना-कोना मह्कावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;अब तु बुल-बुल बनके आ जईतु हो&lt;br&gt;हर साँस में समा जईतु हो&lt;br&gt;अब दिन कटत नइखे कटला से&lt;br&gt;ना मतलब बा महल-दुमहला से&lt;br&gt;</description><pubDate>Sun, 18 Jan 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>बली प्रथा - एगो घोर पाप </title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=137</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Ajit Tiwari&lt;hr&gt;जय माता की !&lt;br&gt;&lt;br&gt;सनातन हिंदू धर्मं में कही भी एह बात के चर्चा नइखे कईल गईल की कवनो देवी-देवता के जीव-जन्तुवन के बली देबे के चाही आउर बली देला से मनोकामना पुरा होला | तबो भी लोग माई दुर्गा चाहे उनका आउर रूप के जीव-जन्तुवन के बली दे रहल बा | माई दुर्गा जेकरा के जगत-जननी कहल जाला,  आदमी , जानवर, चिरई  आउर सभी जीव जेकर संतान हवे, ऊ माई दुर्गा जे संसार के परमममतामई माई हई, उनके सामने उनके संतान के अन्धविश्वासी  आउर धरम के आन्हर लोग के द्वारा गरदन रेत के मुवावाल जाता | का अपाना संतान के ई हालत देख के माई के छाती ना फाटत होई ? दुनीया के कवनो भी माई अपना संतान के आँखी से एक बुंद लोर भी ना देख सकेली | तब फेर अपने संतान के आपना आँखी के सामने गला रेतात देख के जगत-जननी माई दुर्गा का केतना दुखः होत होई  तनी रुअरा सोची ता ?&lt;br&gt; &lt;br&gt;रउरा सभे से हमार ई निहोरा बा एह कुप्रथा के जल्दी से रोके प्रयास करी लोगीन, लोग के समझाई-बुझाई की ई काम ग़लत बा |&lt;br&gt;&lt;br&gt;ई बली देबेवाला काम आपना देश के आउर सब मन्दिर के साथे-साथे थावेवाली माई के मन्दिर में भी होला | बली रोकेवाला सुभ काम के श्रीगणेश थावेवाली माई के मन्दिर से कईल जाव, लोग के समझावल-बुझावल जाव के बली देहल पाप हवे  ऐसे माई खुश ना होली ऊता रोवेली,  माई खुश होली तब ज़ब मन में माई से खूब प्रेम रहेला, उनका कवनो चढावा ना चाही, जईसे हमनी का आपना माई का लगे खालीयो हाथे जाइलेसन ता माई देखते  करेजा से लगा लेबे ले ईना पूछेले के हमरा खातिर का लेआईल बाड़ वैसही माई दुर्गा का भी कुछ ना चाही खाली सरधा-भक्ति होखे के चाही, हां अगर बेटा माई के प्रेम से कुछ दिही त माई का खुसी जरुर होई | ऐसे हमनी का माई के अगर कुछ देबही के बा ता उन्हा के नारियल, लड्डू ,चुनरी ई सब भेंट कईल जाव जावना से माई खुश होके हमनी के आशीर्वाद दिहे |  आख़िर कही-ना-कही से शुरवात करही के परी तबे देश के आउर हिस्सा में भी बढ़िया असर पड़ी आउर सुधार होई |&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;रउरा से रिहोरा बा की ई संकल्प लीही के थावेवाली माई के  मन्दिर में चाहे आउर कही भी होखेवाला बली के अब आउर ना होखे दिहल जाई | सब लोग के समझावल-बुझावल जाई , सही रास्ता पर ले आवल जाई आउर माई जगदम्बा के हिरदय के अब आउर दुःख ना होखे देहल जाई |&lt;br&gt;&lt;br&gt;एह बली नाम के कुप्रथा के जल्दी से आउर हमेसा खातिर कैसे ख़तम कईल जा सकेला रुअरा आपन राय जरुर दिही |&lt;br&gt;&lt;br&gt;चली हमनी का सब आदमी मिलके आपना हित-मित्र , सगा-सम्बन्धी, अडोस-पड़ोस सभका के जागरूक बनावल जाव आउर ई घोर पाप करे से रोकल जाव , हमरा पुरा विश्वास बा के लोग हमनी के बात मान के ई पाप कईल बंद कर दिही आख़िर सब लोग अपने न बा |&lt;br&gt;&lt;br&gt;जय हो माई थावेवाली की !&lt;br&gt;&lt;br&gt;अजीत तिवारी&lt;br&gt;admin@jaimaathawewali.com&lt;br&gt;www.jaimaathawewali.com&lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>Sun, 18 Jan 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>युवा गीत ए.पी.जे. अब्दुल कलाम रचित</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=135</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Binay Pandey&lt;hr&gt;ए.पी.जे. अब्दुल कलाम रचित - Ignited Mind के युवा गीत के अनुवाद.&lt;br&gt;&lt;br&gt;भारत के बानी हम नौजवान,&lt;br&gt;सुसजिज्त हम तकनीक से,&lt;br&gt;ओतप्रोत हम राष्ट्र प्रेम से,&lt;br&gt;लघु स्वप्न बा एक अपराध.&lt;br&gt;&lt;br&gt;अथक परिश्रम करके परिवर्तित,&lt;br&gt;बनाएब भारत के हम विकसित,&lt;br&gt;मानव धरम परमारथ से परपूरित,&lt;br&gt;धन-धान सबल संपदा संबर्धित.&lt;br&gt;&lt;br&gt;हम  बानी एक बालक सहस्र अमोल,&lt;br&gt;देशप्रेम के बा अलख ज्योत अनमोल,&lt;br&gt;भूतल नभतल हर दिशा चहुंओर,&lt;br&gt;देशप्रेम बा बहूमूल्य संसाधन समग्र.&lt;br&gt;&lt;br&gt;हरदम रखब हम यह ज्ञानदीप प्रज्वलित,&lt;br&gt;जब तक ना बन जाई हमार देश विकसित.&lt;br&gt;&lt;br&gt;---अनुवादक :: बिनय पाण्डेय. राँची.&lt;br&gt;&lt;br&gt;&apos; मूल रचना &apos;&lt;br&gt;&lt;br&gt;As a young citizen of India, &lt;br&gt;armed with technology, &lt;br&gt;knowledge and love for my nation, &lt;br&gt;I realize, small aim is crime. &lt;br&gt;The vision of transforming India &lt;br&gt;into a developed nation, &lt;br&gt;&lt;br&gt;powered by value system &lt;br&gt;I am one of the citizens of a billion, &lt;br&gt;only the vision will ignite the billion souls. &lt;br&gt;It has entered into me, &lt;br&gt;the ignited soul compared to any resource, &lt;br&gt;is the most powerful resource on the earth, &lt;br&gt;above the earth and under the earth. &lt;br&gt;I will keep the lamp of knowledge burning &lt;br&gt;to achieve the vision – Developed India.&lt;br&gt;&lt;br&gt;If we work and sweat for the great vision with ignited minds, the transformation leading to birth of vibrant  developed India will happen. This song, when sung in our own beautiful languages will unite our minds for action.&lt;br&gt;&lt;br&gt;-A P J Abdul Kalam &lt;br&gt;Ex President, India&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt; </description><pubDate>Wed, 17 Dec 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>जय थावेवाली माई की !</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=134</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Ajit Tiwari&lt;hr&gt;जय थावेवाली माई की !&lt;br&gt;&lt;br&gt;बिहार प्रान्त के गोपालगंज शहर से मात्र ६ किलो मीटर के दुरी पर सिवान जायेवाला राजमार्ग पर थावे नाम के जगह बा ओहिजा माई थावेवाली के बहुत प्राचीन मंदीर बा | माई थावेवाली के सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी और रहषु भवानी भी कहल जाला |&lt;br&gt;कामरूप (असम) जहा कामख्या देवी के बड़ा प्राचीन और भव्य मंदीर बा माई उहा से थावे अईली एही से माई के कावरू-कामख्या देवी के नाम से भी जानल जाला | थावे में माई कामख्या के बहुत सच्चा भक्त रहषु जी रहनी लेकिन उहा के तत्कालीन राजा मनन सिंह का ई बात में विश्वास ना रहे आ रहषु भगत जी के ढोंगी समझत रहलन | एक दिन राजा मनन सिंह अपना जिद्द पर अड़ गईलन आ रहशु भगत जी के चुनौती दहलन के अगर तू देवी&lt;br&gt;के असली भगत होख्बा ता अभी देवी के बुलाके देखाव नाता तोहरा के दंड दिहल जाई | रहषु जी के बार-बार समझावाला पर भी राजा मनन सिंह ना मनले , अब रहषु जी के लगे माई के बुलावाला के अलावा कवनो रास्ता ना रहे | रहषु जी माई के सुमिरन कईनी माई कामख्या स्थान से चलली आ कलकाता , पटना, आमी होते  हुवे थावे अईली आ साक्षात दर्शन देहली | राजा मनन सिंह के राज-पाट सहित अंत हो गईल |&lt;br&gt;माई जहा दर्शन देहली ओहिजा उहा के मन्दिर बा | रहषु भगत जी के मन्दिर भी ओहिजा लगले बा | माई के दर्शन के बाद रहषुजी के भी दर्शन करे के चाही तबे माई खुश होखेली | आस-पास में राजा मनन सिंह के महल के खँडहर भी बा |&lt;br&gt;माई बहुत दयालु आ कृपालु हई अपना शरण में आइल सभकर कल्याण करेली | हर शुख-दुःख में लोग माई के शरण में जाला आ माई केहू के भी निराश ना करेली सभकर मनोकामना पुरा करेली |&lt;br&gt;केहू का घरे शादी-वियाह होखे तबो लोग माई के आशीर्वाद लेबे जाला, कवनो दुःख-बेमारी होखे तबो लोग मई के शरण में जाला, केहू का कवनो गाड़ी-घोड़ा किनाला ता पहिला पूजा माईकीहा ही होला | माई हर घड़ी आ हार शुख दुःख  में आपना भगतन पर  करुना आ ममता के छाह राखेली सभकर मंगल करेली |&lt;br&gt;देश-विदेश में रहेवाला लोग भी जब साल-दूसाल पर अपना घरे आवेला तब ओकरा सभी काम के सूची में थावेवाली माई के दर्शन एक नम्बर में रहेला |&lt;br&gt;लेकिन एगो अफ़सोस एह बात के बा की आतना महत्व के बावजूद एह स्थान के विकास जेतना होखे के चाही नइखे भईल | आम जनता और प्रशासन के मिलजुल के एह स्थान के समुचित विकास के कोसिस करे के चाही ताकी माई के स्थान विश्व के मानचित्र पर अगो महत्बपूर्ण दर्शानिये स्थल बन जावे |&lt;br&gt;माई के महिमा के गुणगान विश्व भर में करे खातिर हम एगो वेबसाइट बनवले बानी www.jaimaathawewali.com , एहा से माई के कथा , कैसे पहुँची माई के दुवारी, आरती , स्तुति और भी बहुत जानकारी लेहल जा सकेला , साथे-साथे एह विषय पर रउरा आपन विचार भी व्यक्त कर सकिले |&lt;br&gt;जय थावेवाली माई की !&lt;br&gt;रउरा सभे के ....&lt;br&gt;अजित कुमार तिवारी&lt;br&gt;www.jaimaathawewali.com&lt;br&gt; -----------------------------------------------------------------------------------&lt;br&gt;(थावे के एगो मिठाई बड़ा प्रसिद्ध हां जवना के पिदुकिया कहल जाला, शुध देशी घिव में बनेला, ई मिठाई असली ओहिजा मिलेला , वास्तव में बड़ा स्वादिष्ट लागेला | एह मिठाई के प्रसिधी बहुत दूर-दूर ले भइल जाता कुछ और जगह भी अब मिलल सुरु हो गईल बा बकीर जवान स्वाद थावेवाला पिदुकिया के बा ऊ कही और नइखे )</description><pubDate>Fri, 24 Oct 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>सबकरा के लघुवी से पानी पियावे चाह रहल बानी..</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=132</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: abhay tripathi&lt;hr&gt;सबकरा के लघुवी से पानी पियावे चाह रहल बानी..&lt;br&gt;हम दुनिया के कुछ कड़ुवा सच बतावे जा रहल बानी..&lt;br&gt;&lt;br&gt;मान तानी हमरा पास अभी ऊ रूतबा नईखे त का?&lt;br&gt;हमरा चेहरा पर उपदेशक नीयर तेज नईखे त का?&lt;br&gt;सच के सींग पोछ नईखे जे आसानी से पहचानल जाव..&lt;br&gt;हम तऽ ओकरा के बस जामा पहिरावे जा रहल बानी..&lt;br&gt;सबकरा के....&lt;br&gt;&lt;br&gt;हम सही बानी के सोच में सबकर खुशी बसल बा..&lt;br&gt;एकरा में टुटत परिवार आ समाज के दर्द रचल बा..&lt;br&gt;खिसियानी हसी देखा के सब एक दुसरा से कटल बा..&lt;br&gt;हम उहे हसी के पीछे क सच्चाई बतावे जा रहल बानी..&lt;br&gt;सबकरा के....&lt;br&gt;&lt;br&gt;रिश्वत के घुट्टी पी पी के भ्रष्टाचारी बनल बलवान बा..&lt;br&gt;पहिले दाल मे काला रहे अब पूरा दलिये काला बा..&lt;br&gt;गेहुँ के साथे घुन भी पिसाला ई किस्सा सब जानेला..&lt;br&gt;अब तऽ सब घुने बा हम इहे बतावे जा रहल बानी..&lt;br&gt;सबकरा के....&lt;br&gt;&lt;br&gt;धरम के नाम पर सब इक दुसरा के काटे के तैयार बा..&lt;br&gt;हमरा ईहाँ हिन्सा के स्थान नईखे सबकर इहे प्रचार बा..&lt;br&gt;राम, रहीम, गुरु, ईसा के नाम जपला में रोक नईखे..&lt;br&gt;हम त बस ईऽ नाम के अर्थ बतावे चाह रहल बानी..&lt;br&gt;सबकरा के....&lt;br&gt;&lt;br&gt;सबकरा के लघुवी से पानी पियावे चाह रहल बानी..&lt;br&gt;हम दुनिया के कुछ कड़ुवा सच बतावे जा रहल बानी..</description><pubDate>Fri, 17 Oct 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>हमरे अँखिया फुटल बा केहु के पहचान नइखीं पावत..</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=131</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: abhay tripathi&lt;hr&gt;हमरे अँखिया फुटल बा केहु के पहचान नइखीं पावत..&lt;br&gt;साँस त मजगरे चलत बा जिन्दगी के जान नइखीं पावत..&lt;br&gt;राहे सफर के बस एतने फसाना बा..&lt;br&gt;हाथ त बहुत बढ़ल हमहीं जुड़ नइखी पावत..&lt;br&gt;दिल में खाली बतकही वाला कमरे नइखे त का करि हँ अभय.&lt;br&gt;लोग त बोलवावे के कोशिश करत बा हमहीं बोल नइखी पावत..&lt;br&gt;अब सवाल एगुड़े बा हम जीयत काहे बानी.&lt;br&gt;काहे लोगन के बात बात पर लोर बहाव तानी..&lt;br&gt;जवाब ई मिलेला कि सब माया के फेरा बा..&lt;br&gt;उनका पास सिक्का हेड अउर हमरा पास टेल बा..&lt;br&gt;सही दुनो लोग बा बस समझ समझ के फेरा बा.. &lt;br&gt;बस अपना अपना बात पर अड़ल रहे क टेरा बा..&lt;br&gt;इहे सोच के हमार मन गदगद हो जाला..&lt;br&gt;हमरा के जिये खातिर आक्सीजन मिल जाला..</description><pubDate>Tue, 16 Sep 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>भोजपत्र  देवनागरी क्या है ?</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=130</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Binay Pandey&lt;hr&gt;                    &lt;br&gt;भोजपत्र  देवनागरी प्रयुक्त भारतीय भाषा-सब के एगो वेब आधारित साहित्य संग्रह तन्त्र ह। इ वेब आधारित विषय-वस्तु प्रबन्धन खातिर विकसित कइल गइल बा| एकरा के देवनागरी प्रयुक्त कवनो भारतीय भाषा के वास्ते क्रियान्वयन में ले आवल जा सकेला। भोजपत्र के भोजपुरी भाषा खातिर यहाँ प्रयोग कइल गइल बा। जल्दी ही एकरा के हिन्दी के साहित्य संग्रह तन्त्र के रूप में भी क्रियान्वयित कइल जाई। भोजपत्र पर गुणवत्ता वाला कवनो तरह के नीचे लिखल विधा में रचना जमा कइल जा सके ला।&lt;br&gt;&lt;br&gt;गद्य व पद्य &lt;br&gt;&lt;br&gt;लोकप्रिय पारम्परिक लोकोक्तियाँ#&lt;br&gt;&lt;br&gt;उपदेशपरक दोहा व चौपाई#&lt;br&gt;&lt;br&gt;लोकप्रिय पारम्परिक लोकगीत# लोरी, झूमर, सोहर, कजरी, सन्झा, प्राति (पराती), विवाह-विदाई, मटकोर-गीत, चैता, अल्ला रुदल जइसन.&lt;br&gt;&lt;br&gt;जवन आपन धरोहर# विलुप्त हो रहल  बा,  ऑकरा के बचावे के दिशा  मे  भोजपत्र एक बहुत ही छोटा प्रयास बा. भोजपुरी में अभी भी पारम्परिक श्रुति प्रथा चलत बा एक पीढी से दोसर पीढी तक. जेसे बहुत कुछ (आपन पारम्परिक धरोहर#) के बिला जाये के डर बा। चले के अपना  थाती के सहेजल जाव भविष्य के पीढी के खातिर. जय हो सबन के. &lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>Tue, 16 Sep 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item></channel></rss>