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		<title>&#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; &#2342;&#2375;&#2357;&#2344;&#2366;&#2327;&#2352;&#2368; :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2369;&#2352;&#2368; &#2360;&#2366;&#2361;&#2367;&#2340;&#2381;&#2351; &#2360;&#2306;&#2327;&#2381;&#2352;&#2361; - Content Channel</title>
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		<description>&#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; &#2342;&#2375;&#2357;&#2344;&#2366;&#2327;&#2352;&#2368; : &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2369;&#2352;&#2368; &#2360;&#2366;&#2361;&#2367;&#2340;&#2381;&#2351; &#2360;&#2306;&#2327;&#2381;&#2352;&#2361; : BhojPATRA Devanagri :: An Online Database of Bhojpuri Articles</description>
				
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		<title>BhojPATRA Devangari Bhojpuri Collection</title>
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<item><title>हमार दुरगत बा ई महगाई से</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=162</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: sanjay singh&lt;hr&gt;हमार दुरगत बा ई महगाई से ---------&lt;br&gt;तनखाह कम बा खरचा ढेरो बा&lt;br&gt;</description><pubDate>Sun, 18 Mar 2012 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>मत देख</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=156</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Shyama Singh&lt;hr&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;मत देख बार-बार&lt;br&gt;&lt;br&gt;सनेह भरल नजरिया से,&lt;br&gt;&lt;br&gt;कुछ दरके लागेला।&lt;br&gt;&lt;br&gt;संसकारन के ताबूत में&lt;br&gt;&lt;br&gt;करतब्यन के कफ़न ओढ़&lt;br&gt;&lt;br&gt;दफ़न हो चुकल लाश से&lt;br&gt;&lt;br&gt;कुछ सरके लागेला।&lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>Sun, 02 Jan 2011 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>नाता</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=155</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Shyama Singh&lt;hr&gt;कवनो-कवनो नाता,&lt;br&gt;&lt;br&gt;बेनामो निमन लागेला।&lt;br&gt;&lt;br&gt;मुँह ना ताके,&lt;br&gt;&lt;br&gt;कवनो संबोधन के,&lt;br&gt;&lt;br&gt;मनवां के भीतर,&lt;br&gt;&lt;br&gt;दिया के बाती&lt;br&gt;&lt;br&gt;अइसन जरत रहेला।&lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>Sun, 02 Jan 2011 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>??? ??? ???? ????? ?? ?????? ???? ??? ???? ???......</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=154</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Rakesh kumar Yadav&lt;hr&gt;??? ??? ???? ????? ?? ?????? ???? ??? ???? ???......&lt;br&gt;    ??????? ?? ??? ?? ? ??? ??? ??? ?? ????,&lt;br&gt;    &lt;br&gt;     </description><pubDate>Thu, 30 Dec 2010 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>अभियन्ता दिवस - १५ सितम्बर </title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=152</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Binay Pandey&lt;hr&gt;15 सितम्बर को देश के महान इंजीनियर भारत रत्न स्वर्गीय श्री मोक्षगुण्डम् विश्वेश्वरैया के जयंती अभियंता दिवस के रूप में मनावल जाला.  देश और समाज के निर्माण में अभियंता वर्ग के रचनात्मक भूमिका कइसन होवे के चाही, यह स्वर्गीय श्री विश्वेश्वरैया के प्रेरणादायक जीवन गाथा से समझल जा सकेला.&lt;br&gt;&lt;br&gt;महान् इंजीनियर सर मोक्षगुण्डम् विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितम्बर 1860 को तत्कालीन मैसूर (वर्तमान कर्नाटक) राज्य के कोलार जिले के अन्तर्गत चिक्काबल्लापुर नामक तालुका में भईल रहे. ऊ कठोर परिश्रम से एक कुशल इंजीनियर बनकर देश और समाज में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनवल. &lt;br&gt;&lt;br&gt;स्वर्गीय श्री विश्वेश्वरैया देश के सर्वाधिक वरिष्ठ इंजीनियर रहलन, जवन आपन  जीवन के अंतिम क्षण तक एक तपस्वी के रूप में देश और समाज को उल्लेखनीय सेवा देलन. स्वर्गीय श्री विश्वेश्वरैया के 101 वर्षीय जीवन देश और दुनिया के समस्त अभियंता के वास्ते एक आदर्श प्रेरणा स्त्रोत ह। भारत में सिंचाई परियोजनाओं सहित अधोसंरचना विकास के विभिन्न कार्य में उनकर ऐतिहासिक योगदान रहल. वर्तमान कर्नाटक (तत्कालीन मैसूर) राज्य में देश की आजादी से पहिले परिश्रम से निर्मित कृष्ण राज सागर बांध स्वर्गीय श्री विश्वेश्रैया के कुशल तकनीकी मार्गदर्शन और कठोर परिश्रम से तैयार भइल, जेकर भरपूर लाभ आज भी वहां के लाखों किसानों के मिल रहल बा। &lt;br&gt;&lt;br&gt;वर्ष 1947 में श्री विश्वेश्वरैया के अखिल भारतीय निर्माता संघ का अध्यक्ष बनावल गईल। तब ऊ उड़ीसा की नदियन में बाढ़ की समस्या से निपटल खातिर सरकार के आपन अध्ययन प्रतिवेदन प्रस्तुत कईलन, जिसके आधार पर महानदी में विश्व प्रसिध्द हीराकुद बांध बनावल गईल। इ बांध से उड़ीसा में लाखों किसानन के भरपूर फायदा हो रहल बा.  &lt;br&gt;&lt;br&gt; स्वर्गीय श्री विश्वेश्वरैया न केवल एक कुशल इंजीनियर रहलन बल्कि देश के सर्वश्रेष्ठ योजना शिल्पी, शिक्षाविद् और अर्थशास्त्री भी रहस। उ तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) द्वारा वर्ष 1928 में तैयार पंचवर्षीय योजना से भी आठ वर्ष पहले 1920 में अपनी पुस्तक रिकंस्ट्रक्टिंग इंडिया में पंचवर्षीय योजना की परिकल्पना प्रस्तुत कर देले रहन. एकरा बाद वर्ष 1935 में एक पुस्तक प्लान्ड इकॉनामी फॉर इंडिया भी लिखलन। वह 98 वर्ष की उम्र में भी प्लानिंग पर एक पुस्तक लिखलन. ईमानदारी और कर्त्तव्य के प्रति अपनी वचनबध्दता उनके जीवन की सबसे बड़ी विशेषता थी।&lt;br&gt;&lt;br&gt;बंगलुरू स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहल. भारत सरकार ने वर्ष 1955 में उनकरा के देश के सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न से सम्मानित कईलस और जब ऊ एक सौ वर्ष के भेलन त उनकर सम्मान में डाक टिकट भी जारी भईल। स्वर्गीय श्री विश्वेश्वरैया के निधन 101 की आयु में 14 अप्रैल 1962 के भईल व भारत के एक चमकत सूरज डूब गईल हमेशा के खातिर.&lt;br&gt;&lt;br&gt;अभियन्ता दिवस के अवसर  पर  स्वर्गीय श्री विश्वेश्वरैया जी को शत् शत् नमन.&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>Wed, 15 Sep 2010 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>करम</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=146</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: ravi raj&lt;hr&gt;मेहनत करि फल के चिन्ता मत करि.&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;रबिकान्त तेजपुरवा ९९५३०३९३५०</description><pubDate>Fri, 26 Jun 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title> परभु कृष्णा के भजन</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=145</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Anand Dubey&lt;hr&gt; नन्द नगारि के राजकुमार, किषना जैसन केहु ना बा, हो  कइलन गौवाल बाल सनग लीला हजार, वैसन केहु ना बा २&lt;br&gt;&lt;br&gt;शयाम वरन, घुघराले बाल.. , नटखट, मनमोहक उनकर चाल, सारा जगत के राखेलेन खयाल, वैसन केहु ना बा, वैसन केहु ना बा.. ननद नगरि के राजकुमार, किषना जैसन केहु ना बा,&lt;br&gt;&lt;br&gt;राधा जी के पऋयतम हउवन..., रुकमीन जी के जान..., मीरा जी के लागल शयामा से धयान...।&lt;br&gt;सुरदास कयीलन गजबे बखान..., माखन चोर नटखट घनशयाम..., जिनकर लिला बावे ापरमपार।।&lt;br&gt;ारेह, ननद नगारि के राजकुमार, किषना जैसन केहु ना बा, हो  कइलन गौवाल बाल सनग लीला हजार, वैसन केहु ना बा २&lt;br&gt;&lt;br&gt;जब २ धरती पर बडल ातयाचार, सनतन के जियल कइले राखचस दुशवार,लीलाधर लेलेनी ाौतार,&lt;br&gt;दुषटन के करि ले सनहार, सनतन पर करीले, कऋपा बारेबार,वइसन केहु ना बा, वइसन केहु ना बा।&lt;br&gt;ारेह, ननद नगारि के राजकुमार, किषना जैसन केहु ना बा, हो  कइलन गौवाल बाल सनग लीला हजार, वैसन केहु ना बा २&lt;br&gt;&lt;br&gt;सानचे कहिले भइया करिह विशवास, कऋषना लगइहन भवसागर पार, पऋत के सागर हउवन,ामरीत के खान, भकत वतसल, शऋ हरि के अवतार, ऊनके शरण मे होइ सबकर उधार, वइसन केहु ना बा, वइसन केहु ना बा।।  ननद नगारि के राजकुमार, किषना जैसन केहु ना बा, हो  कइलन गौवाल बाल सनग लीला हजार, वैसन केहु ना बा २&lt;br&gt; &lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>Fri, 26 Jun 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>हमरा चान लागे लू</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=140</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Hridaya Narayan Singh&lt;hr&gt;तू देख जनि चान, हमरा चान लागे लू।&lt;br&gt;मचा देबू कहियो तूफान लागे लू।&lt;br&gt;&lt;br&gt;मत करिह सिंगार, मिली ओरहन हजार&lt;br&gt;तोहके देखे खातिर मेला में हो जायी मार&lt;br&gt;रूप के तू बड़हन दुकान लागे लू।&lt;br&gt;&lt;br&gt;केहू आपन दौलत करेला निछावुर&lt;br&gt;सुध-बुध केहू खो के बनि जाना बाउर&lt;br&gt;तूर देबू सबकर गुमान लागू लू।&lt;br&gt;&lt;br&gt;हंसि हंसि के जन आज बिजुरी गिराव&lt;br&gt;अभिज्ञात जी के जनि पागल बनाव&lt;br&gt;अंगड़ाई ले लू कमान लागे लू।</description><pubDate>Wed, 15 Apr 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>तु साँझ के रंग में आवेलु</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=138</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Ajit Tiwari&lt;hr&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;हमरा मनवा के भावेलु&lt;br&gt;कबो पायल बजावत&lt;br&gt;कबो चूड़ी खनकावत&lt;br&gt;धीरे-धीरे..आहिस्ता-आहिस्ता&lt;br&gt;हमरा जीयरा में समायेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;तु चैन-सुकून बनके आवेलु&lt;br&gt;प्रितिया के आँचर ओढ़ावेलु&lt;br&gt;हम दिन भर के काम से रहिले थाकल&lt;br&gt;तोहरा अँचरा के पाके हो जाईले पागल&lt;br&gt;सुतल रही चाहे रहिले जागल&lt;br&gt;तु प्रेम के अमृत बरसावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;कबो हिरनी बनके आवेलु&lt;br&gt;हमरा अंखिया में बस जायेलु&lt;br&gt;बलखात चलेलु.... इठ्लात चलेलु&lt;br&gt;मंद-मंद मुस्कात चलेलु&lt;br&gt;कांच-कपोल से.. प्यार के बोल से&lt;br&gt;करेजवा पर तीर चलावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;कबो कोईल बनके आवेलु&lt;br&gt;प्रीत के गीत सुनावेलु&lt;br&gt;तोहरा बोलीया में मिसीरी घुलल बा&lt;br&gt;तोहरा बिना मुस्किल जीयल बा&lt;br&gt;प्यार के मीठ गीतिया से&lt;br&gt;जिनगी भर के प्यास बुझावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;तु मोरीनी बनके आवेलु&lt;br&gt;अखियन से नींद चुरावेलु&lt;br&gt;खुदे बरसेलु बादल बनके&lt;br&gt;खुदे गीरेलु बिजुरी बनके&lt;br&gt;जीयरा में अगीया लगावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;कबो बेली बनके आवेलु&lt;br&gt;कबो चमेली बनके आवेलु&lt;br&gt;खुशुबू के बगईचा बनके&lt;br&gt;कोमलता से छुवेलु हमके&lt;br&gt;मनवा के कोना-कोना मह्कावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;अब तु बुल-बुल बनके आ जईतु हो&lt;br&gt;हर साँस में समा जईतु हो&lt;br&gt;अब दिन कटत नइखे कटला से&lt;br&gt;ना मतलब बा महल-दुमहला से&lt;br&gt;</description><pubDate>Sun, 18 Jan 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>बली प्रथा - एगो घोर पाप </title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=137</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Ajit Tiwari&lt;hr&gt;जय माता की !&lt;br&gt;&lt;br&gt;सनातन हिंदू धर्मं में कही भी एह बात के चर्चा नइखे कईल गईल की कवनो देवी-देवता के जीव-जन्तुवन के बली देबे के चाही आउर बली देला से मनोकामना पुरा होला | तबो भी लोग माई दुर्गा चाहे उनका आउर रूप के जीव-जन्तुवन के बली दे रहल बा | माई दुर्गा जेकरा के जगत-जननी कहल जाला,  आदमी , जानवर, चिरई  आउर सभी जीव जेकर संतान हवे, ऊ माई दुर्गा जे संसार के परमममतामई माई हई, उनके सामने उनके संतान के अन्धविश्वासी  आउर धरम के आन्हर लोग के द्वारा गरदन रेत के मुवावाल जाता | का अपाना संतान के ई हालत देख के माई के छाती ना फाटत होई ? दुनीया के कवनो भी माई अपना संतान के आँखी से एक बुंद लोर भी ना देख सकेली | तब फेर अपने संतान के आपना आँखी के सामने गला रेतात देख के जगत-जननी माई दुर्गा का केतना दुखः होत होई  तनी रुअरा सोची ता ?&lt;br&gt; &lt;br&gt;रउरा सभे से हमार ई निहोरा बा एह कुप्रथा के जल्दी से रोके प्रयास करी लोगीन, लोग के समझाई-बुझाई की ई काम ग़लत बा |&lt;br&gt;&lt;br&gt;ई बली देबेवाला काम आपना देश के आउर सब मन्दिर के साथे-साथे थावेवाली माई के मन्दिर में भी होला | बली रोकेवाला सुभ काम के श्रीगणेश थावेवाली माई के मन्दिर से कईल जाव, लोग के समझावल-बुझावल जाव के बली देहल पाप हवे  ऐसे माई खुश ना होली ऊता रोवेली,  माई खुश होली तब ज़ब मन में माई से खूब प्रेम रहेला, उनका कवनो चढावा ना चाही, जईसे हमनी का आपना माई का लगे खालीयो हाथे जाइलेसन ता माई देखते  करेजा से लगा लेबे ले ईना पूछेले के हमरा खातिर का लेआईल बाड़ वैसही माई दुर्गा का भी कुछ ना चाही खाली सरधा-भक्ति होखे के चाही, हां अगर बेटा माई के प्रेम से कुछ दिही त माई का खुसी जरुर होई | ऐसे हमनी का माई के अगर कुछ देबही के बा ता उन्हा के नारियल, लड्डू ,चुनरी ई सब भेंट कईल जाव जावना से माई खुश होके हमनी के आशीर्वाद दिहे |  आख़िर कही-ना-कही से शुरवात करही के परी तबे देश के आउर हिस्सा में भी बढ़िया असर पड़ी आउर सुधार होई |&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;रउरा से रिहोरा बा की ई संकल्प लीही के थावेवाली माई के  मन्दिर में चाहे आउर कही भी होखेवाला बली के अब आउर ना होखे दिहल जाई | सब लोग के समझावल-बुझावल जाई , सही रास्ता पर ले आवल जाई आउर माई जगदम्बा के हिरदय के अब आउर दुःख ना होखे देहल जाई |&lt;br&gt;&lt;br&gt;एह बली नाम के कुप्रथा के जल्दी से आउर हमेसा खातिर कैसे ख़तम कईल जा सकेला रुअरा आपन राय जरुर दिही |&lt;br&gt;&lt;br&gt;चली हमनी का सब आदमी मिलके आपना हित-मित्र , सगा-सम्बन्धी, अडोस-पड़ोस सभका के जागरूक बनावल जाव आउर ई घोर पाप करे से रोकल जाव , हमरा पुरा विश्वास बा के लोग हमनी के बात मान के ई पाप कईल बंद कर दिही आख़िर सब लोग अपने न बा |&lt;br&gt;&lt;br&gt;जय हो माई थावेवाली की !&lt;br&gt;&lt;br&gt;अजीत तिवारी&lt;br&gt;admin@jaimaathawewali.com&lt;br&gt;www.jaimaathawewali.com&lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>Sun, 18 Jan 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item></channel></rss>
