<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" ?> 


<rss version="2.0">

	<channel>
		<title>&#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; &#2342;&#2375;&#2357;&#2344;&#2366;&#2327;&#2352;&#2368; :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2369;&#2352;&#2368; &#2360;&#2366;&#2361;&#2367;&#2340;&#2381;&#2351; &#2360;&#2306;&#2327;&#2381;&#2352;&#2361; - Content Channel</title>
		<link>http://www.bhojpatra.net</link>
		<description>&#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; &#2342;&#2375;&#2357;&#2344;&#2366;&#2327;&#2352;&#2368; : &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2369;&#2352;&#2368; &#2360;&#2366;&#2361;&#2367;&#2340;&#2381;&#2351; &#2360;&#2306;&#2327;&#2381;&#2352;&#2361; : BhojPATRA Devanagri :: An Online Database of Bhojpuri Articles</description>
				
	<image>
		<title>BhojPATRA Devangari Bhojpuri Collection</title>
		<url>http://www.bhojpatra.net/bhojpatra.gif</url>
		<link>http://www.bhojpatra.net</link>
	</image>
<item><title>तु साँझ के रंग में आवेलु</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=138</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Ajit Tiwari&lt;hr&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;हमरा मनवा के भावेलु&lt;br&gt;कबो पायल बजावत&lt;br&gt;कबो चूड़ी खनकावत&lt;br&gt;धीरे-धीरे..आहिस्ता-आहिस्ता&lt;br&gt;हमरा जीयरा में समायेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;तु चैन-सुकून बनके आवेलु&lt;br&gt;प्रितिया के आँचर ओढ़ावेलु&lt;br&gt;हम दिन भर के काम से रहिले थाकल&lt;br&gt;तोहरा अँचरा के पाके हो जाईले पागल&lt;br&gt;सुतल रही चाहे रहिले जागल&lt;br&gt;तु प्रेम के अमृत बरसावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;कबो हिरनी बनके आवेलु&lt;br&gt;हमरा अंखिया में बस जायेलु&lt;br&gt;बलखात चलेलु.... इठ्लात चलेलु&lt;br&gt;मंद-मंद मुस्कात चलेलु&lt;br&gt;कांच-कपोल से.. प्यार के बोल से&lt;br&gt;करेजवा पर तीर चलावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;कबो कोईल बनके आवेलु&lt;br&gt;प्रीत के गीत सुनावेलु&lt;br&gt;तोहरा बोलीया में मिसीरी घुलल बा&lt;br&gt;तोहरा बिना मुस्किल जीयल बा&lt;br&gt;प्यार के मीठ गीतिया से&lt;br&gt;जिनगी भर के प्यास बुझावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;तु मोरीनी बनके आवेलु&lt;br&gt;अखियन से नींद चुरावेलु&lt;br&gt;खुदे बरसेलु बादल बनके&lt;br&gt;खुदे गीरेलु बिजुरी बनके&lt;br&gt;जीयरा में अगीया लगावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;कबो बेली बनके आवेलु&lt;br&gt;कबो चमेली बनके आवेलु&lt;br&gt;खुशुबू के बगईचा बनके&lt;br&gt;कोमलता से छुवेलु हमके&lt;br&gt;मनवा के कोना-कोना मह्कावेलु&lt;br&gt;तु साँझ के रंग में आवेलु&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;अब तु बुल-बुल बनके आ जईतु हो&lt;br&gt;हर साँस में समा जईतु हो&lt;br&gt;अब दिन कटत नइखे कटला से&lt;br&gt;ना मतलब बा महल-दुमहला से&lt;br&gt;</description><pubDate>Sun, 18 Jan 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>बली प्रथा - एगो घोर पाप </title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=137</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Ajit Tiwari&lt;hr&gt;जय माता की !&lt;br&gt;&lt;br&gt;सनातन हिंदू धर्मं में कही भी एह बात के चर्चा नइखे कईल गईल की कवनो देवी-देवता के जीव-जन्तुवन के बली देबे के चाही आउर बली देला से मनोकामना पुरा होला | तबो भी लोग माई दुर्गा चाहे उनका आउर रूप के जीव-जन्तुवन के बली दे रहल बा | माई दुर्गा जेकरा के जगत-जननी कहल जाला,  आदमी , जानवर, चिरई  आउर सभी जीव जेकर संतान हवे, ऊ माई दुर्गा जे संसार के परमममतामई माई हई, उनके सामने उनके संतान के अन्धविश्वासी  आउर धरम के आन्हर लोग के द्वारा गरदन रेत के मुवावाल जाता | का अपाना संतान के ई हालत देख के माई के छाती ना फाटत होई ? दुनीया के कवनो भी माई अपना संतान के आँखी से एक बुंद लोर भी ना देख सकेली | तब फेर अपने संतान के आपना आँखी के सामने गला रेतात देख के जगत-जननी माई दुर्गा का केतना दुखः होत होई  तनी रुअरा सोची ता ?&lt;br&gt; &lt;br&gt;रउरा सभे से हमार ई निहोरा बा एह कुप्रथा के जल्दी से रोके प्रयास करी लोगीन, लोग के समझाई-बुझाई की ई काम ग़लत बा |&lt;br&gt;&lt;br&gt;ई बली देबेवाला काम आपना देश के आउर सब मन्दिर के साथे-साथे थावेवाली माई के मन्दिर में भी होला | बली रोकेवाला सुभ काम के श्रीगणेश थावेवाली माई के मन्दिर से कईल जाव, लोग के समझावल-बुझावल जाव के बली देहल पाप हवे  ऐसे माई खुश ना होली ऊता रोवेली,  माई खुश होली तब ज़ब मन में माई से खूब प्रेम रहेला, उनका कवनो चढावा ना चाही, जईसे हमनी का आपना माई का लगे खालीयो हाथे जाइलेसन ता माई देखते  करेजा से लगा लेबे ले ईना पूछेले के हमरा खातिर का लेआईल बाड़ वैसही माई दुर्गा का भी कुछ ना चाही खाली सरधा-भक्ति होखे के चाही, हां अगर बेटा माई के प्रेम से कुछ दिही त माई का खुसी जरुर होई | ऐसे हमनी का माई के अगर कुछ देबही के बा ता उन्हा के नारियल, लड्डू ,चुनरी ई सब भेंट कईल जाव जावना से माई खुश होके हमनी के आशीर्वाद दिहे |  आख़िर कही-ना-कही से शुरवात करही के परी तबे देश के आउर हिस्सा में भी बढ़िया असर पड़ी आउर सुधार होई |&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;रउरा से रिहोरा बा की ई संकल्प लीही के थावेवाली माई के  मन्दिर में चाहे आउर कही भी होखेवाला बली के अब आउर ना होखे दिहल जाई | सब लोग के समझावल-बुझावल जाई , सही रास्ता पर ले आवल जाई आउर माई जगदम्बा के हिरदय के अब आउर दुःख ना होखे देहल जाई |&lt;br&gt;&lt;br&gt;एह बली नाम के कुप्रथा के जल्दी से आउर हमेसा खातिर कैसे ख़तम कईल जा सकेला रुअरा आपन राय जरुर दिही |&lt;br&gt;&lt;br&gt;चली हमनी का सब आदमी मिलके आपना हित-मित्र , सगा-सम्बन्धी, अडोस-पड़ोस सभका के जागरूक बनावल जाव आउर ई घोर पाप करे से रोकल जाव , हमरा पुरा विश्वास बा के लोग हमनी के बात मान के ई पाप कईल बंद कर दिही आख़िर सब लोग अपने न बा |&lt;br&gt;&lt;br&gt;जय हो माई थावेवाली की !&lt;br&gt;&lt;br&gt;अजीत तिवारी&lt;br&gt;admin@jaimaathawewali.com&lt;br&gt;www.jaimaathawewali.com&lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>Sun, 18 Jan 2009 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>युवा गीत ए.पी.जे. अब्दुल कलाम रचित</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=135</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Binay Pandey&lt;hr&gt;ए.पी.जे. अब्दुल कलाम रचित - Ignited Mind के युवा गीत के अनुवाद.&lt;br&gt;&lt;br&gt;भारत के बानी हम नौजवान,&lt;br&gt;सुसजिज्त हम तकनीक से,&lt;br&gt;ओतप्रोत हम राष्ट्र प्रेम से,&lt;br&gt;लघु स्वप्न बा एक अपराध.&lt;br&gt;&lt;br&gt;अथक परिश्रम करके परिवर्तित,&lt;br&gt;बनाएब भारत के हम विकसित,&lt;br&gt;मानव धरम परमारथ से परपूरित,&lt;br&gt;धन-धान सबल संपदा संबर्धित.&lt;br&gt;&lt;br&gt;हम  बानी एक बालक सहस्र अमोल,&lt;br&gt;देशप्रेम के बा अलख ज्योत अनमोल,&lt;br&gt;भूतल नभतल हर दिशा चहुंओर,&lt;br&gt;देशप्रेम बा बहूमूल्य संसाधन समग्र.&lt;br&gt;&lt;br&gt;हरदम रखब हम यह ज्ञानदीप प्रज्वलित,&lt;br&gt;जब तक ना बन जाई हमार देश विकसित.&lt;br&gt;&lt;br&gt;---अनुवादक :: बिनय पाण्डेय. राँची.&lt;br&gt;&lt;br&gt;&apos; मूल रचना &apos;&lt;br&gt;&lt;br&gt;As a young citizen of India, &lt;br&gt;armed with technology, &lt;br&gt;knowledge and love for my nation, &lt;br&gt;I realize, small aim is crime. &lt;br&gt;The vision of transforming India &lt;br&gt;into a developed nation, &lt;br&gt;&lt;br&gt;powered by value system &lt;br&gt;I am one of the citizens of a billion, &lt;br&gt;only the vision will ignite the billion souls. &lt;br&gt;It has entered into me, &lt;br&gt;the ignited soul compared to any resource, &lt;br&gt;is the most powerful resource on the earth, &lt;br&gt;above the earth and under the earth. &lt;br&gt;I will keep the lamp of knowledge burning &lt;br&gt;to achieve the vision – Developed India.&lt;br&gt;&lt;br&gt;If we work and sweat for the great vision with ignited minds, the transformation leading to birth of vibrant  developed India will happen. This song, when sung in our own beautiful languages will unite our minds for action.&lt;br&gt;&lt;br&gt;-A P J Abdul Kalam &lt;br&gt;Ex President, India&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt; </description><pubDate>Wed, 17 Dec 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>जय थावेवाली माई की !</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=134</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Ajit Tiwari&lt;hr&gt;जय थावेवाली माई की !&lt;br&gt;&lt;br&gt;बिहार प्रान्त के गोपालगंज शहर से मात्र ६ किलो मीटर के दुरी पर सिवान जायेवाला राजमार्ग पर थावे नाम के जगह बा ओहिजा माई थावेवाली के बहुत प्राचीन मंदीर बा | माई थावेवाली के सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी और रहषु भवानी भी कहल जाला |&lt;br&gt;कामरूप (असम) जहा कामख्या देवी के बड़ा प्राचीन और भव्य मंदीर बा माई उहा से थावे अईली एही से माई के कावरू-कामख्या देवी के नाम से भी जानल जाला | थावे में माई कामख्या के बहुत सच्चा भक्त रहषु जी रहनी लेकिन उहा के तत्कालीन राजा मनन सिंह का ई बात में विश्वास ना रहे आ रहषु भगत जी के ढोंगी समझत रहलन | एक दिन राजा मनन सिंह अपना जिद्द पर अड़ गईलन आ रहशु भगत जी के चुनौती दहलन के अगर तू देवी&lt;br&gt;के असली भगत होख्बा ता अभी देवी के बुलाके देखाव नाता तोहरा के दंड दिहल जाई | रहषु जी के बार-बार समझावाला पर भी राजा मनन सिंह ना मनले , अब रहषु जी के लगे माई के बुलावाला के अलावा कवनो रास्ता ना रहे | रहषु जी माई के सुमिरन कईनी माई कामख्या स्थान से चलली आ कलकाता , पटना, आमी होते  हुवे थावे अईली आ साक्षात दर्शन देहली | राजा मनन सिंह के राज-पाट सहित अंत हो गईल |&lt;br&gt;माई जहा दर्शन देहली ओहिजा उहा के मन्दिर बा | रहषु भगत जी के मन्दिर भी ओहिजा लगले बा | माई के दर्शन के बाद रहषुजी के भी दर्शन करे के चाही तबे माई खुश होखेली | आस-पास में राजा मनन सिंह के महल के खँडहर भी बा |&lt;br&gt;माई बहुत दयालु आ कृपालु हई अपना शरण में आइल सभकर कल्याण करेली | हर शुख-दुःख में लोग माई के शरण में जाला आ माई केहू के भी निराश ना करेली सभकर मनोकामना पुरा करेली |&lt;br&gt;केहू का घरे शादी-वियाह होखे तबो लोग माई के आशीर्वाद लेबे जाला, कवनो दुःख-बेमारी होखे तबो लोग मई के शरण में जाला, केहू का कवनो गाड़ी-घोड़ा किनाला ता पहिला पूजा माईकीहा ही होला | माई हर घड़ी आ हार शुख दुःख  में आपना भगतन पर  करुना आ ममता के छाह राखेली सभकर मंगल करेली |&lt;br&gt;देश-विदेश में रहेवाला लोग भी जब साल-दूसाल पर अपना घरे आवेला तब ओकरा सभी काम के सूची में थावेवाली माई के दर्शन एक नम्बर में रहेला |&lt;br&gt;लेकिन एगो अफ़सोस एह बात के बा की आतना महत्व के बावजूद एह स्थान के विकास जेतना होखे के चाही नइखे भईल | आम जनता और प्रशासन के मिलजुल के एह स्थान के समुचित विकास के कोसिस करे के चाही ताकी माई के स्थान विश्व के मानचित्र पर अगो महत्बपूर्ण दर्शानिये स्थल बन जावे |&lt;br&gt;माई के महिमा के गुणगान विश्व भर में करे खातिर हम एगो वेबसाइट बनवले बानी www.jaimaathawewali.com , एहा से माई के कथा , कैसे पहुँची माई के दुवारी, आरती , स्तुति और भी बहुत जानकारी लेहल जा सकेला , साथे-साथे एह विषय पर रउरा आपन विचार भी व्यक्त कर सकिले |&lt;br&gt;जय थावेवाली माई की !&lt;br&gt;रउरा सभे के ....&lt;br&gt;अजित कुमार तिवारी&lt;br&gt;www.jaimaathawewali.com&lt;br&gt; -----------------------------------------------------------------------------------&lt;br&gt;(थावे के एगो मिठाई बड़ा प्रसिद्ध हां जवना के पिदुकिया कहल जाला, शुध देशी घिव में बनेला, ई मिठाई असली ओहिजा मिलेला , वास्तव में बड़ा स्वादिष्ट लागेला | एह मिठाई के प्रसिधी बहुत दूर-दूर ले भइल जाता कुछ और जगह भी अब मिलल सुरु हो गईल बा बकीर जवान स्वाद थावेवाला पिदुकिया के बा ऊ कही और नइखे )</description><pubDate>Fri, 24 Oct 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>सबकरा के लघुवी से पानी पियावे चाह रहल बानी..</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=132</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: abhay tripathi&lt;hr&gt;सबकरा के लघुवी से पानी पियावे चाह रहल बानी..&lt;br&gt;हम दुनिया के कुछ कड़ुवा सच बतावे जा रहल बानी..&lt;br&gt;&lt;br&gt;मान तानी हमरा पास अभी ऊ रूतबा नईखे त का?&lt;br&gt;हमरा चेहरा पर उपदेशक नीयर तेज नईखे त का?&lt;br&gt;सच के सींग पोछ नईखे जे आसानी से पहचानल जाव..&lt;br&gt;हम तऽ ओकरा के बस जामा पहिरावे जा रहल बानी..&lt;br&gt;सबकरा के....&lt;br&gt;&lt;br&gt;हम सही बानी के सोच में सबकर खुशी बसल बा..&lt;br&gt;एकरा में टुटत परिवार आ समाज के दर्द रचल बा..&lt;br&gt;खिसियानी हसी देखा के सब एक दुसरा से कटल बा..&lt;br&gt;हम उहे हसी के पीछे क सच्चाई बतावे जा रहल बानी..&lt;br&gt;सबकरा के....&lt;br&gt;&lt;br&gt;रिश्वत के घुट्टी पी पी के भ्रष्टाचारी बनल बलवान बा..&lt;br&gt;पहिले दाल मे काला रहे अब पूरा दलिये काला बा..&lt;br&gt;गेहुँ के साथे घुन भी पिसाला ई किस्सा सब जानेला..&lt;br&gt;अब तऽ सब घुने बा हम इहे बतावे जा रहल बानी..&lt;br&gt;सबकरा के....&lt;br&gt;&lt;br&gt;धरम के नाम पर सब इक दुसरा के काटे के तैयार बा..&lt;br&gt;हमरा ईहाँ हिन्सा के स्थान नईखे सबकर इहे प्रचार बा..&lt;br&gt;राम, रहीम, गुरु, ईसा के नाम जपला में रोक नईखे..&lt;br&gt;हम त बस ईऽ नाम के अर्थ बतावे चाह रहल बानी..&lt;br&gt;सबकरा के....&lt;br&gt;&lt;br&gt;सबकरा के लघुवी से पानी पियावे चाह रहल बानी..&lt;br&gt;हम दुनिया के कुछ कड़ुवा सच बतावे जा रहल बानी..</description><pubDate>Fri, 17 Oct 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>हमरे अँखिया फुटल बा केहु के पहचान नइखीं पावत..</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=131</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: abhay tripathi&lt;hr&gt;हमरे अँखिया फुटल बा केहु के पहचान नइखीं पावत..&lt;br&gt;साँस त मजगरे चलत बा जिन्दगी के जान नइखीं पावत..&lt;br&gt;राहे सफर के बस एतने फसाना बा..&lt;br&gt;हाथ त बहुत बढ़ल हमहीं जुड़ नइखी पावत..&lt;br&gt;दिल में खाली बतकही वाला कमरे नइखे त का करि हँ अभय.&lt;br&gt;लोग त बोलवावे के कोशिश करत बा हमहीं बोल नइखी पावत..&lt;br&gt;अब सवाल एगुड़े बा हम जीयत काहे बानी.&lt;br&gt;काहे लोगन के बात बात पर लोर बहाव तानी..&lt;br&gt;जवाब ई मिलेला कि सब माया के फेरा बा..&lt;br&gt;उनका पास सिक्का हेड अउर हमरा पास टेल बा..&lt;br&gt;सही दुनो लोग बा बस समझ समझ के फेरा बा.. &lt;br&gt;बस अपना अपना बात पर अड़ल रहे क टेरा बा..&lt;br&gt;इहे सोच के हमार मन गदगद हो जाला..&lt;br&gt;हमरा के जिये खातिर आक्सीजन मिल जाला..</description><pubDate>Tue, 16 Sep 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>भोजपत्र  देवनागरी क्या है ?</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=130</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Binay Pandey&lt;hr&gt;                    &lt;br&gt;भोजपत्र  देवनागरी प्रयुक्त भारतीय भाषा-सब के एगो वेब आधारित साहित्य संग्रह तन्त्र ह। इ वेब आधारित विषय-वस्तु प्रबन्धन खातिर विकसित कइल गइल बा| एकरा के देवनागरी प्रयुक्त कवनो भारतीय भाषा के वास्ते क्रियान्वयन में ले आवल जा सकेला। भोजपत्र के भोजपुरी भाषा खातिर यहाँ प्रयोग कइल गइल बा। जल्दी ही एकरा के हिन्दी के साहित्य संग्रह तन्त्र के रूप में भी क्रियान्वयित कइल जाई। भोजपत्र पर गुणवत्ता वाला कवनो तरह के नीचे लिखल विधा में रचना जमा कइल जा सके ला।&lt;br&gt;&lt;br&gt;गद्य व पद्य &lt;br&gt;&lt;br&gt;लोकप्रिय पारम्परिक लोकोक्तियाँ#&lt;br&gt;&lt;br&gt;उपदेशपरक दोहा व चौपाई#&lt;br&gt;&lt;br&gt;लोकप्रिय पारम्परिक लोकगीत# लोरी, झूमर, सोहर, कजरी, सन्झा, प्राति (पराती), विवाह-विदाई, मटकोर-गीत, चैता, अल्ला रुदल जइसन.&lt;br&gt;&lt;br&gt;जवन आपन धरोहर# विलुप्त हो रहल  बा,  ऑकरा के बचावे के दिशा  मे  भोजपत्र एक बहुत ही छोटा प्रयास बा. भोजपुरी में अभी भी पारम्परिक श्रुति प्रथा चलत बा एक पीढी से दोसर पीढी तक. जेसे बहुत कुछ (आपन पारम्परिक धरोहर#) के बिला जाये के डर बा। चले के अपना  थाती के सहेजल जाव भविष्य के पीढी के खातिर. जय हो सबन के. &lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>Tue, 16 Sep 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>कुणाल सिंह से मनोज भावुक के बात चीत</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=129</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Manoj Bhawuk&lt;hr&gt;कुणाल सिंह से मनोज भावुक के बात चीत&lt;br&gt;&lt;br&gt;भोजपुरी भाषा के हम कर्जदार बानी - कुणाल सिंह &lt;br&gt;प्रस्तुति- मनोज भावुक &lt;br&gt;&lt;br&gt;भोजपुरी के लोकप्रिय अभिनेता कुणाल सिंह के फिल्म-समीक्षक लोग &amp;apos;भोजपुरी सिनेमा के अमिताभ बच्चन &amp;apos; कहेला हालांकि कुणाल जी अपना के एगो साधारन कलाकार के रूप में देखनी। ई कुणाल जी के विनम्रता आ बड़प्पन बा। हालांकि ई बात त सांचे बा जे आज भी कुणाल जी के फिल्म में लिहल फायदा के सौदा ही मानल जाला। इहे वजह बा जे आज के फिल्म में भी (नया फिल्म मे) उहां के कहीं ना कहीं, कवनो ना कवनो रूप मे जरूर दिखाई पड़िले। माई के दुलार, सजना के अंगना, गांव-देस उहां के नया फिल्म ह । एह फिल्म के निर्मातालोग के कहनाम बा कि कुणाल जी के नाम पर फिल्म कुछ चलि जाला। पता ना ई बात केतना सांच बा? पर एह में एतना सच्चाई त जरूर बा कि सुजीत कुमार आ राकेश पाण्डे के बाद अगर केहू अपना दम-खम पर, अपना नाम पर भोजपुरी फिल्म चलावे में सफल भइल त ऊ एकमात्र नाम बा- कुणाल सिंह। कुणाल सिंह के भोजपुरी भोजपुर आ आरा-छपरा के भोजपुरी ह । उनुका में भोजपुरी माटी के संस्कार बा। भोजपुरी के हरेक रश्मोरिवाज से ऊ वाकिफ बाड़न । छोट-छोट बात के विश्लेषण ऊ भोजपुरिया अंदाज में करेलन । उनकर इहे गुण उनका के भोजपुरी फिल्म के सफल हीरो के रूप में स्थापित कइलस। हंसमुख आ मृदुभाषी स्वभाव के अपना एह लोकप्रिय अभिनेता से आज से 4 बरिस पहिले सन ई0 2002 मे कई बेर उनका निवास स्थान- पुनम दर्शन, अंधेरी(पूर्व) में भेंट-मुलाकात भइल आ रसगर, मनगर आ सारगर्भित बात-चीत भइल। प्रस्तुत बा बात-चीत के प्रमुख अंश- &lt;br&gt;&lt;br&gt; &lt;br&gt;&lt;br&gt;भावुक- भोजपुरी सिनेमा के वर्तमान स्थिति से का रउरा संतुष्ट बानी। &lt;br&gt;कुणाल सिंह- ना, बिलकुल ना &lt;br&gt;&lt;br&gt;भावुक-का वजह बा, एह निराशाजनक स्थिति के? &lt;br&gt;&lt;br&gt;कुणाल सिंह -कई गो वजह बा- &lt;br&gt;पहिला- फिल्म इंडस्ट्री एगो हीरो के कंधा पर ना चलि सके । सुजीत कुमार आ राकेश पाण्डे के बाद हमरा के छोड़ के केहू उभर के ना आइल। हमहूं केतना दिन ले हीरो बनब। हमार एगो उम्र भइल। त उम्र के एह पड़ाव पर बाग बगइचा में हीरोइन के साथे हमार नाचल शोभा दी का? आज जरूरत बा एगो नया खोज के, जे लंबा पारी के खेल खेल सके। आ ओह प्रतिभा के भोजपुरिया समाज के बीच से ही खोजे के पड़ी, काहें कि उहे भोजपुरी के भोजपुरी के रूप में पर्दा पर उतार सकी। अब त जे पइसा लगावत बा, उहे भा ओकरे बेटा-भतीजा हीरो बनत बा। अइसन स्थिति में एगो प्रतिभा के खोज निकालल बड़ा मुश्किल काम बा आ जब ले एगो अइसन प्रतिभा खड़ा ना होई, जेकरा पर आंख मूंद के लोग विश्वास क सके, आपन पूंजी लगा सके, त हर बेर, हर फिल्म में नया-नया आदमी पर प्रयोग होत रही।एक्सपेरिमेंट के हम बुरा नइखीं मानत मगर कुछ निष्कर्ष त निकले। केहू उभर के त आवे,जेकरा मजबूत कंधा पर हमनी एह चालीस साल पुरान विरासत के भार सौंप सकीं। &lt;br&gt;दूसरा कारन बा- समुचित सरकारी सहायता आ आपसी संगठन के अभाव। शुरूये से भोजपुरी सिनेमा से सबंधित लोगन के अनेक तरह के कठिनाई के सामना करें के पड़ल बा। सबसे अफसोस के बात त ई बा कि उत्तर प्रदेश आ बिहार जइसन प्रांत, जे भोजपुरी भाषा के सबसे बड़ गढ़ ह, ओकरो सरकार भोजपुरी फिल्म के विकास पर ध्यान नइखे देत। तब होत ई बा कि भोजपुरी फिल्म के सामना सीधे हिन्दी फिल्म से हो जाता। सिनेमा हाल के टिकट के दर हिन्दी आ भोजपुरी दूनों खातिर बरोबरे बा। अब रउरे बताईं कि अइसन स्थिति में करोड़ो के बजट वाला हिन्दी फिल्म देखल लोग पसंद करी कि 20-25 लाख के बजट में बनल भोजपुरी फिल्म । &lt;br&gt;तीसरा वजह बा कि आमतौर पर भोजपुरी फिल्म के जे दर्शक बा, ऊ गरीब बा, मजदूर वर्ग के लोग बा। पेट काट के केहू केतना फिल्म देखी? आ जब पेटे काट के देखे के बा त ओही पइसवा में हिन्दी सिनेमा काहें ना देखीं? &lt;br&gt;एह दौर के एको गो हिट फिल्म के राउरा नाम बताईं। कहां से हिट होई? देशी मुर्गी बिलायती बोल। रउरा भोजपुरी में आपन चीज ना देखाएव त के देखी? हिन्दी वाला चीज हिन्दी में ना देखीं? भोजपुरी बनावे के बा त भोजपुरी बनाईं, हिन्दी के नकल मत करीं। लेकिन एह घरीं नकलची लोग ढेर पैदा हो गइल बा। हिन्दी के नकल क के रउरा भोजपुरी फिल्म बनाइब त चली? ना चली त हिट फिल्म कहां से आईं? &lt;br&gt;एगो बहुत महत्तव्पूर्ण वजह बा- फिल्म के प्रचार-प्रसार। हम त &amp;apos;महाभोजपुर&amp;apos; से पहिले भोजपुरी पत्रिके ना देखले रहनी हं । भोजपुरी फिल्म खातिर कवनो पेपर- पत्रिका ना। हिन्दी फिल्म के तमाम चैनल आ दूरदर्शन पर प्रचार-प्रसार होला, बाकिर भोजपुरी के कौन चैनल प्रचार-प्रसार करी। &lt;br&gt;हिन्दी फिल्म पर्दा पर टंगाये से पहिलहीं घर-घर में पहुँच जाला आ भोजपुरी फिल्म पर्दा पर टंगइलो के बाद पब्लिक के बीच ना पहुंचे। काहे? प्रचार-प्रसार के कमी से । इहां त फिल्म लागल बीबी नं0 1 त बीबी नं0 1, बीबी नं0 1बीबी नं0 1 एतना बेर कान में गूंज गइल आ आंख के सामने नाच गइल कि एकरा के मन से उतारलो मुश्किल हो गइल बाकिर कवन भोजपुरी फिल्म के साथे अइसन होला? त एह दिशा में भी गंभीरता से सोचे के जरूरत बा। एह समस्या के समाधान खातिर भोजपुरी चैनल के स्थापना पर विचार कइल जा सकेला। &lt;br&gt;&lt;br&gt;भावुक- जी, बिल्कुल । हम रउरा से सहमत बानी। आज सख्त जरूरत बा एगो भोजपुरी चैनल के जवना पर भोजपुरी फिल्म, भोजपुरी टेलीफिल्म, सिरियल आ फिल्म प्रचार-प्रसार का साथे भोजपुरी के अउर भी बहुत सारा कार्यक्रम, न्यूज वगैरह देखावल जा सके। एह से दुनिया के पता चली कि आज भोजपुरी में का हो रहल बा आ भोजपुरिया संस्कृति के जड़ केतना गहरा बा। बाकिर एकरा खातिर पहल के करी, का कोई, कइसे होईं? रउरा एह लाइन के सफल आ समर्थ व्यक्ति बानी। रउरा से हमनी के अपेक्षा भी बा आ आग्रह भी कि रउरा एह दिशा मे गंभीरता से विचार करीं आ कुछ निष्कर्ष निकालीं। &lt;br&gt;&lt;br&gt;कुणाल सिंह- जी, प्रयास चलता, आगे भगवान के मर्जी। अरे एगो समस्या नइखे नू। अब सिनेमा हाल के नियमो बदल गइल बा। एह दिशा में सोचे के जरूरत बा। पहिले नियम इ रहे जे पर डे के हाल के जेतना किराया बा, अगर ओकरा से दू-चार हजार भी अधिक आवता त फिल्म चलत रही, पर्दा पर से ना जाई।जइसे पर डे के किराया अगर 20 हजार बा त 25 हजार ले टिकट आवता त फिल्म चलत रही बाकिर अब फिल्म लगावे का पहिलहीं 80-90 हजार जमा करें के बा। इहो एगो बड़हन समस्या बा। दोसरा प्रदेश मे क्षेत्रीय फिल्म हाल में लगावे के बाध्यता बा। बिहार, यू.पी. में नइखे। एह से भोजपुरी फिल्म उपेक्षित बा। हम बहुत दुखी बानी। भोजपुरी सिनेमा के हमरा कवनो भविष्य नजर नइखे आवत । कवनो संभावना नइखे लउकत। जब लोग ना जागी, अपना मातृभाषा के प्रति प्रेम ना जागी, हीन भावना ना खतम होई। सरकार ध्यान ना दी, तब ले भोजपुरी के मालिक भगवाने बाड़न। &lt;br&gt;(थोडिका देर कुणाल जी आ हम खमोश रहनी। हम गंभीरता के तूरे के खियाल से बात के दिशा बदलनी) &lt;br&gt;भावुक- कुणाल जी, रउरा भोजपुरी फिल्म में सबसे अधिक केकरा से प्रभावित बानी? &lt;br&gt;कुणाल सिंह- लक्ष्मण शाहाबादी से। लक्ष्मण शहाबादी के कलम के बल पर केतना फिल्म भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में मील के पत्थर बनि गइल। उनका गीत-संगीत के जोड़ नइखे। उनका दुनिया छोड़ देला से भोजपुरी सिनेमा से गीत-संगीत खतमे हो गइल। ऊ हीरा आदमी रहलन हं। अब लक्ष्मण शहाबादी जइसन लोग कहाँ मिली? लक्ष्मण भईया बहुत दिलेर आ सहज-सरल आदमी रहलन हं, उनका एह सोझिया स्वभाव के बहुत लोग फायदा उठावल। कहाँ-कहाँ से पइसा जुटा के ऊ एगो फिल्म &amp;apos;दुल्हा गंगा पार के&amp;apos; बनवलन। ओह में उनकर खूब शोषण भइल। ई हमरा से बर्दाश्त ना भइल आ एकरा खातिर निर्देशक से झगड़ो हो गइल। आज लक्ष्मण भईया नइखन बाकिर उनकर गीत-संगीत उनका के कबो मरे ना दी। लक्ष्मण भईया के बिना भोजपुरी सिनेमा के इतिहास अधूरा बा। &lt;br&gt;&lt;br&gt;भावुक- जी, हमरा बहुत अफसोस बा, कि हम अइसन महान आ विलक्षण प्रतिभा से मिल ना सकनी। खैर हम एगो व्यक्तिगत प्रश्न पूछे के चाहत बानी। इजाजत बा? कुणाल सिंह- पूछीं-पूछीं, हमरा खातिर हर भोजपुरिया अपने बा। संकोच कइसन? &lt;br&gt; &lt;br&gt;----------------------------------------------------------------------------------------- &lt;br&gt;&lt;br&gt;कुणाल सिंह अभिनीत प्रमुख भोजपुरी फिल्म- &lt;br&gt;धरती मइया, गंगा किनारे मोरा गांव, दुल्हा गंगा पार के, हमार भउजी, पिया रखिह सेनुरवा के लाज, बिहारी बाबू, दगाबाज बलमा, हमार दुल्हा, पिया टूटे ना पिरितिया हमार, गंगा-ज्वाला, बेटी उधार के, कसम गंगा जल के, चुटकी भर सेनुर,कब अइहें दुल्हा हमार, छोटकी बहू, हमार बेटवा , बैरी कंगना, घर-अंगना, चल सखी दुल्हा देखे, माई कसम, दुल्हा-दुलहिन, हक के लड़ाई, सात फेरे, साथ हमार- तोहार, पलकन के मेहमान, सुहाग बिंदिया, पिया बिन नाहीं चैन, राम जइसन भईया हमार, गोदना, माई के दुलार, गांव-देस, सजना के अंगना आदि। &lt;br&gt;----------------------------------------------------------------------------------------- &lt;br&gt;&lt;br&gt;भावुक- भाभी (आरती भट्टाचार्या) जे भोजपुरी फिल्म के पहिला महिला निर्देशिका बाड़ी, रउरा जीवन में कइसे अइनी? माने रउरा लव मैरेज कइनी कि अरेंज मैरेज। कुणाल सिंह-(मुस्मुरात) हमरा पहिलही बुझाइल ह जे कवनो खतरनाक सवाल ह । कोलकाता में &amp;apos;कल हमारा है&amp;apos; (हिन्दी फिल्म) के शूटिग चलत रहे। हम ओह फिल्म में हीरो रहनी। आरती भी अभिनय करत रहली। शुरूआत में परिचय भइल आ आगे चली के ऊ परिणय में बदल गइल। अब एकरा के लव मैरेज कहीं चाहे अरेंज मैरेज। &lt;br&gt;भावुक- राउर शुरूआत हिन्दी फिल्म से भइल, भोजपुरी में काहें अइनी? &lt;br&gt;कुणाल सिंह- शुरूआत हिन्दी फिल्म (कल हमारा है) से भइल, ई सही बा, बाकिर भोजपुरी फिल्म &amp;apos;धरती मइया&amp;apos; के अपार सफलता हमरा के भोजपुरी फिल्म में काम करे खातिर उत्प्रेरित कइलस। हमरा बुझाइल जे हम भोजपुरिये खातिर बनल बानी। हालांकि हम भोजपुरी के साथे-साथे दर्जनो हिन्दी फिल्म- नैन मिले चैन कहां, मुर्दे की जान खतरे में, घर-द्वार, माशुका, दोस्ती की सौगन्ध, बागी सुलताना, मुसीबत बोल के आए आदि आ कई गो बांगला फिल्म आ कई गो टी.वी सीरियल (हमारी परम्परा, राज, गीत-संगीत, डुप्लीकेट, ओ मारिया, काला सोना, सुजाता, अतीत आदि) में भी काम कइनी, बाकिर हमरा पहचान मिलल भोजपुरी फिल्म से ही, हम एह भाषा के कर्जदार बानी। &lt;br&gt;&lt;br&gt; &lt;br&gt;&lt;br&gt;भावुक- जी, कोशिश करब ई कर्ज उतारे के, हालांकि महतारी के कर्ज आज ले केहू उतार नइखे सकल। मातृभाषा महतारिये लेखा होले। &lt;br&gt;&lt;br&gt;कुणाल सिंह- बिलकुल। भोजपुरी में हम पइसा खातिर ना, एहू खातिर काम करत रहल बानी जे भोजपुरी फिल्म बनत रहो आ आगे भी हमार कोशिश रही कि हम भोजपुरी फिल्म-निर्माण मातृभक्ति लेखा करीं। &lt;br&gt;&lt;br&gt;भावुक- जी, रउरा से बात-चीत क के मन गदगद हो गइल। बहुत बहुत धन्यवाद आ शुभकामना। &lt;br&gt;</description><pubDate>Sat, 16 Sep 2006 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>जनकवि कैलाश गौतम - हिन्दी-भोजपुरी के सुप्रसिद्ध</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=128</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Manoj Bhawuk&lt;hr&gt;हिन्दी-भोजपुरी के सुप्रसिद्ध गीतकार स्मृतिशेष जनकवि कैलाश गौतम &lt;br&gt;&lt;br&gt;संस्मरण- श्रद्धांजली &lt;br&gt; &lt;br&gt;हिन्दी-भोजपुरी के सुप्रसिद्ध गीतकार स्मृतिशेष जनकवि कैलाश गौतम &lt;br&gt;&lt;br&gt;9 दिसम्बर 2006, के हिन्दी- भोजपुरी के एगो सुनहरा अध्याय के समापन हो गइल।विश्वासे नइखे होत कि कैलाश गौतम जी अब ना रहनी। &lt;br&gt;कैलाश गौतम जी हमार प्रिय कवि ओह दिन बन गइनी जब भारतीय नृत्य कला मन्दिर, पटना के कवि -सम्मेलन मे उहाँ क़ॆ &amp;apos; अमावस के मेला&amp;apos; कविता सुनवले रहनी।ई बात 10 -11 साल पहिले के ह। कविवर सत्यनारायण जी संचालक रहीं। उ कविता हम बरिसन ले गुनगुनात रहनी । तब हम कवि ना रहीं । आ तब हम इहो ना जानत रहनी कि अपना एह प्रिय कवि के , एह लोककवि के हम एतना प्रिय हो जायेब। &lt;br&gt;&lt;br&gt;हमरा भारतीय भाषा परिषद से सम्मान के घोषणा भइल आ उहाँ क़ॆ फोन से बधाई देनी। तब से बात चीत कुछ बेसिये बढ गइल रहे। &lt;br&gt;&lt;br&gt;एही 19 नवम्बर के त बात भइल रहे उहाँ सॆ । उहाँ के कहनी &amp;apos;बेटे लंदन से आना तो मिलना जरूर .. और हाँ तुम्हारी किताब मुझे मिल गयी है। अकादमी पत्रिका के अगले अंक मे समीक्षा प्रकाशित कर रहे हैं। तुम भोजपुरी में बहुत अच्छा काम कर रहे हो।मै तो लोगों को दिखाता हूँ क़ि सजनिया, पिरितिया ,कितबिया ... ये सब लिखना छोड़ कर ऐसी भाषा का प्रयोग करो । मुझे तुम्हारी गजलें पसन्द हैं। &lt;br&gt;&lt;br&gt;--- जी लेकिन हिन्दी-उर्दू के कुछ लोग तो ये मानने को तैयार ही नही है कि भोजपुरी मे भी गजल हो सकता है। &lt;br&gt;&lt;br&gt;-- अरे उन लोगों को पता ही नही है. भारतेन्दु जी के समकालीन तेग अली तेग के समय से भोजपुरी गजल लिखा जा रहा है।मै तुम्हारे किताब की समीक्षा मे इन सबका जिक्र करूंगा। .. और सुनाओ ,और सब ठीक है न? &lt;br&gt;&lt;br&gt;जी ठीक है। डा0 कृष्ण कुमार, बर्मिंघम बहुभाषीय समुदाय वाले आप को याद कर रहे थे। &lt;br&gt;- हाँ-हाँ , लंदन आने की मेरी योजना है लेकिन इस साल नहीं। &lt;br&gt;- आइए ना, अपना घर तो है ही। .... इधर आपकी एक कविता पढी अभिव्यक्ति में - &amp;apos;गाँव गया था , गाँव से भागा&amp;apos; । शारजाह से पुर्णिमा वर्मन जी निकालती हैं। &lt;br&gt;&lt;br&gt;- ओ मिरज़ापुर वाली लड़की ।...... सबको मेरा प्रणाम कहना । &lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;जी कह दूंगा। .... जी आपसे कुछ कहना था। &lt;br&gt;कहो ना। &lt;br&gt;&lt;br&gt;मेरी हार्दिक इच्छा है कि मेरी दुसरी किताब &amp;apos; जिनिगी रोज सवाल&amp;apos; की भूमिका आप हीं लिख दे। &lt;br&gt;&lt;br&gt;- लिख दूंगा बेटे लिख दूंगा । इस किताब पर भी मै अब तक लिख दिया होता। किताब तो बहुत पहले ही मिल गयी थी।पांडेय कपिल जी ने भेज दिया था लेकिन बाद मे वह प्रति भारतीय भाषा परिषद की निदेशक ममता कालिया जी ले गयी । अब तुम्हारी किताब फिर आ गयी है । मै इस पर लिख रहा &lt;br&gt;&lt;br&gt;हमरा का पता रहे कि पिता समान गुरु जनकवि कैलाश गौतम जी के हमरा से ई अंतिम बातचीत ह। अंतिम आशिर्वाद ह। फिर उहाँ के हमरा से कबो बात ना करब। &lt;br&gt;अभिव्यक्ति मे उहाँ के निधन के समाचार पढके हम त सन्न रह गइनी । सहसा यकीने ना भइल। लागल कि उहाँ पर कवनो आलेख छपल होई । जब ई देखनी कि ना ई खाली आलेख ना ह ,ई त जनकवि के श्रद्धांजलि भी ह त रो पड़नी । &lt;br&gt;&lt;br&gt;आज हम स्मृतिशेष जनकवि कैलाश गौतम के पावन स्मृति के प्रणाम करत अपना ओर से आ भोजपत्र टीम का ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि निवेदित क रहल बानी। &lt;br&gt;&lt;br&gt;-------------------------- &lt;br&gt;जनकवि कैलाश गौतम के रचना-संसार इहाँ देखीं- &lt;br&gt;अभिव्यक्ति &lt;br&gt;जनकवि कैलाश गौतम के रचना-संसार :: अभिव्यक्ति &lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;कविता कोश् &lt;br&gt;&lt;br&gt;http://hi.literature.wikia.com/wiki/Current_events &lt;br&gt;</description><pubDate>Sat, 16 Sep 2006 00:00:00 GMT</pubDate></item><item><title>राकेश पाण्डेय से मनोज भावुक के बात-चीत</title><link>http://www.bhojpatra.net/pathakrss.asp?a_id=127</link><description>BhojPATRA :: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2340;&#2381;&#2352; :: Manoj Bhawuk&lt;hr&gt;राकेश पाण्डेय से मनोज भावुक के बात-चीत&lt;br&gt;&lt;br&gt;प्रेमचन्द के उपन्यासन पर भोजपुरी फिल्म बने के चाही -राकेश पाण्डेय &lt;br&gt;&lt;br&gt;प्रस्तुति- मनोज भावुक &lt;br&gt;सुपर डुपर हिट फिल्म ‘बलम परदेशिया ‘ से आपन सशक्त पहचान बनावे वाला अभिनेता राकेश पाण्डेय आजुवो कवनो न कवनो रूप में फिल्म जगत में सक्रिय बानी।सन 2002 में जुहू तारा रोड़ पर अवस्थित उहाँ के निवास स्थान ‘बंसत बहार’ में बइठ के उहाँ के फिल्मी सफर का संदर्भ में एगो लंबा गपशप भइल रहे।पेश बा उहाँ से बात-चीत के मुख्य अंश - &lt;br&gt;भावुक - रउवा अपना अब तक के फिल्मी सफर के बारे में बताईं। &lt;br&gt;राकेश पाण्डे- सन ई. 1966 में फिल्म एण्ड टेलीविजन इंस्टीच्यूट आफ इण्डिया, पूणे से एक्टिंग में डिप्लोमा कइला के बाद हम मुम्बई आ गइनी आ इप्टा में सक्रिय हो गइनी। राजेन्द्र यादव के उपन्यास &amp;apos;सारा आकाश&amp;apos; पर आधारित कलात्मक फिल्म (निर्देशक- बासु चटर्जी ) हमार पहिला फिल्म रहे। ओकरा बाद कई गो कलात्मक आ कमर्शियल फिल्म में नायक-खलनायक के रूप में काम कइलीं- &amp;apos;कभी धूप कभी छांव, आंसू बन गये फूल, आन्दोलन मृग-तृष्णा, एक गांव की कहानी, मुट्ठी भर चावल,शंतरज के मोहरे, इंतजार, वो मैं नही, हिमालय से ऊँचा, मंजिल, सेवक, मैला आंचल, मान जाइये, दिल की राहें, अनोखा दान, मेरा रक्षक, रखवाला, दिल चाहता हैं, बैगरह-बैगरह बाकिर हमार पहचान त बनल भोजपुरी फिल्म से। &lt;br&gt;भावुक- भोजपुरी फिल्म में राउर प्रवेश कइसे भइल? &lt;br&gt;राकेश पाण्डे- सन ई. 1975 में नाजीर हुसैन साहब से हमार मुलाकत भइल। हिन्दी सिनेमा में उहाँ का हमार काम देखलहीं रहनी। भोजपुरी खातिर प्रस्ताव रखनी। हमरा सामने भाषा के समस्या रहे। हमार जनम हिमाचल प्रदेश में भइल बा। भोजपुरी ना आवत रहे। बाकिर नाजीर हुसैन साहेब के जिद्द के आगे हमरा घुटना टेके के पड़ल। तब त हम सपनों में ना सोचले रहनी कि नाजीर साहेब हमरा खातिर अइसन फिल्म लेके आइल बानी, जवना से हम हमेशा-हमेशा खातिर भोजपुरी के होके रह जाइब। 1977 में बलम परदेशिया बनल आ ओकर सफलता हमरा के भोजपुरी फिल्म जगत में स्थापित क देलस। तब से आज ले लगभग पचास गो भोजपुरी फिल्म में बतौर नायक अभिनय कइलीं। &amp;apos;बलम परदेशिया&amp;apos; के बाद &amp;apos;रूस गइले सइया हमार&amp;apos; , भइया दूज , आ धरती मइया के हम आपन सबसे अधिक सफल फिल्म मानिलें। भोजपुरी के पहिला धारावाहिक &amp;apos;सांची पिरितिया&amp;apos; जवन कि लखनऊ आ पटना से प्रसारित भइल, में हम काम कइलीं आ आजुवो सक्रिय बानी। ई टी.वी पर कई गो भोजपुरी प्रोजेक्ट बा। ओकरा फेर में लागल बानी। &lt;br&gt;--------------------------------------------------------------------- &lt;br&gt;&lt;br&gt;राकेश पाण्डे अभिनित कुछ प्रमुख भोजपुरी फिल्म - &lt;br&gt;बलम परदेसिया, गंगा कहे पुकार के, रूस गइलें सइयां हमार, चनवा के ताके चकोर, बैरी कंगना, बिरहिन जनम-जनम के, धरती मइया, सात फेरे, भइया दूज, गंगा हमार माई, सइयां तोरे कारन, घर गृहस्थी, बिटिया भइल सयान, संपूर्ण तीर्थयात्रा, गंगा सूरज, बहुरिया, सोनवा के पिंजरा, धनिया-मुनिया, सैंया मगन पहलवानी में, रखिह राखी के लाज, टूटे ना पिरितिया के डोर, भैया भउजी के दुलार, हक के लड़ाई, सेनुर, घर-मंदिर, बटोहिया, बंसुरिया बाजे गंगा तीर, गजब भइल रामा, गंगा जइसन भउजी हमार, पलना में झूले ललना, हे तुलसी मइया, रखिह लाज अंचरवा के, बलमा नादान, तुलसी सोहें हमार अंगना, आदि। &lt;br&gt;--------------------------------------------------------------- &lt;br&gt;भावुक - अच्छा बात बा जे अपने फेर में लागल बानी। बहुत लोग के मुंह से सुनत बानी। कान पाक गइल बा। सभे फेर में लागल बा, बावजूद एकरा अब ऊ लहर नइखे, जवन शुरूआती दौर में रहे, का वजह बा? &lt;br&gt;राकेश पाण्डे - कई गो वजह बा, पहिला बा स्क्रिप्ट के कमजोरी। अश्लील आ अलूल-जलूल स्क्रिप्ट से भोजपुरी फिल्म के पतन भइल बा। जेकरा फिल्म के ए.बी.सी.डी. नइखे मालूम, उहो स्क्रिप्ट राइटर बनि जाता। कुछ लोग त निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक , हीरो अपने सब बाड़न। एह मानसिकता में कइसन फिल्म बनीं। &lt;br&gt;&lt;br&gt; &lt;br&gt;&lt;br&gt;भावुक- (बात काटत) पाण्डे जी, अपने स्क्रिप्ट के बात करत बानी, भोजपुरी फिल्म खातिर कइसन स्क्रिप्ट चाहीं? &lt;br&gt;राकेश पाण्डे- (तपाक से) प्रेमचन्द के उपान्यास जइसन। प्रेमचन्द के उपन्यास पर भोजपुरी फिल्म बनो। ढंग से बनो। ईमानदारी से बनो ना त हमार विश्वास बा कि फिल्म जरूर सफल होई। &lt;br&gt;भावुक- पाण्डे जी माफ करीं हम रउरा से सहमत बानी बाकिर भोजपुरी साहित्य में भी अइसन बहुत उपन्यास लिखाइल बा भा भोजपुरी में बहुत अइसन लोककथा बा, जवना पर फिल्म बनावल जाय त हमार विश्वास बा कि एक बेर फेर भोजपुरी के लोहा सभे माने लागी। अइसे अपने के बात करत रहनी ह प्रेमचन्द जी के उपन्यास के त उहाँ के उपन्यास पर ढंग से फिल्म बनावे खातिर कवनो बड़ निर्माता के पहल करें के पड़ी। अइसन निर्माता भोजपुरी में कय गो बाड़न? आ जे बा ऊ खुदे स्क्रिप्ट राइटर बा, ऊ अपना के प्रेमचन्द से कम थोड़े बुझेला। &lt;br&gt;राकेश पाण्डे- (हंसत) बात त सही बा बाकिर एकर कारणों बा। भोजपुरी में बहुत अधिक बजट के फिल्म नइखे बनावल जा सकत। कारन कि भोजपुरी के क्षेत्र सीमित बा, एह से बड़ा बजट के पूर्ति कइल कठिन बा। सरकारी मदद त बा ना। जवन करे के बा, अपने करे के बा। एह से निर्माता बजट कम करे खातिर खुदे निर्देशक आ स्क्रिप्ट राइटर बनि जात बाड़न। &lt;br&gt;भावुक- बाकिर एह से फिल्म के गुणवता पर त प्रभाव पड़त बा? &lt;br&gt;राकेश पाण्डे- बिल्कुल पड़त बा। एही से सरकारण के सहयोग जरूरी बा, जवन कि दोसरा भाषा के फिल्मनि के मिलि रहल बा। &lt;br&gt;भावुक- सुननी हं कि अपने भी निर्देशन में हाथ साफ करे लागल बानी? &lt;br&gt;राकेश पाण्डे- सी ग्रेड के निर्देशक के अन्डर में काम कइल मुश्किल बा।तीन दशक हो गइल , फिल्म लाइन में काम करत हमरा।आंख के सामने कुछऊ उल्टा-सीधा होत रहो आ हम बर्दाश्त करत रहीं, संभव नइखे। एह से अपना मन -मिजाज के फिल्म बनावे खातिर हम खुदे निर्देशन करे के बात सोचनी आ &amp;apos; बसुरिया बाजे गंगा तीर&amp;apos; आ &amp;apos;तुलसी सोहे हमरा अंगना&amp;apos; के निर्देशन कइलीं- &lt;br&gt;भावुक- आगे का विचार बा? &lt;br&gt;राकेश पाण्डे- एगो अइसन फिल्म बनावे के सोच रहल बानी, जवना से भोजपुरी फिल्म बनावे के लहर शुरू हो जाव। &lt;br&gt;भावुक- बहुत अच्छा बा। अद् भुत। हमार शुभकामना बा। हार्दिक इच्छा बा। भगवान करस ऊ शुभ दिन जल्दी आवे। अपने हमरा साथे अतना नीमन बात-चीत कइनी। बहुत-बहुत धन्यवाद। &lt;br&gt;</description><pubDate>Tue, 16 Sep 2008 00:00:00 GMT</pubDate></item></channel></rss>