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		<description>: &#2349;&#2379;&#2332;&#2346;&#2369;&#2352;&#2368; &#2360;&#2366;&#2361;&#2367;&#2340;&#2381;&#2351; &#2360;&#2306;&#2327;&#2381;&#2352;&#2361; : BhojPATRA 
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<item><title>बुझउल</title><author>bharti pandey</author><link>http://www.bhojpatra.com/pathakrss.asp?a_id=261</link><description>१ चार सुगा चार रंग&lt;br&gt;  चउरी चउरंग रंग&lt;br&gt;  पिजडे़ में एक रंग        (उतर-पान)&lt;br&gt;&lt;br&gt;२ खैर कसईली चूना पान&lt;br&gt;   दो बेकत के बाईस कान   (उतर- रावण मंदोदरी)&lt;br&gt;   &lt;br&gt;       &lt;br&gt;  डाँ भारती पांडेय</description><pubDate>4/5/2008</pubDate></item><item><title>फागुन में फगवा गवाये लागल हो मन पुरवा बयार.</title><author>Praveen Singh</author><link>http://www.bhojpatra.com/pathakrss.asp?a_id=260</link><description>फागुन में फगवा गवाये लागल हो मन पुरवा बयार. ..&lt;br&gt;&lt;br&gt;Phagun me phguwa gawaye lagal ho man purwa bayar,&lt;br&gt;&lt;br&gt;Bahkawe lagal ho, man purwa bayar,&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;Kali koiliya kuhoke din rati,&lt;br&gt;&lt;br&gt;gehoma ba lagrat lagraye lagal bali,&lt;br&gt;&lt;br&gt;amwa ke per mojraye lagal go..&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;man purwa bayar bahkaw lagal ho,&lt;br&gt;&lt;br&gt;man purwa bayar,&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;nawki bahuria likah bari pati,&lt;br&gt;&lt;br&gt;saiya ji aaja, kaheli  din rati,&lt;br&gt;&lt;br&gt;manwa me preet umraye lagal hoo&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;man purwa bayar, bahkawe lahal ho,&lt;br&gt;&lt;br&gt;man purwa bayar..........,&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>3/5/2008</pubDate></item><item><title>भोजपुरी भाषियों पर कहर</title><author>Binay Pandey</author><link>http://www.bhojpatra.com/pathakrss.asp?a_id=257</link><description>पिछले कुछ दिन से बहुत दुःखद व विचलित कर देवे वाला समाचार आ रहल बा.&lt;br&gt;ई आपन देश और समाज के लिये कतई ठीक नईखे.&lt;br&gt; देश के नवयुवक लोग को क्या सीख मिली राज ठाकरे के ऒछी राजनीति से?&lt;br&gt;महाराष्ट्र के हित देश से बड़हन बाटे का?&lt;br&gt;भोजपुरी लोग पर कहर अपराध बा लेकिन केन्द्र सरकार मूक बिया.राज ठाकरे की गिरफ्तारी काहे ना हो रहल बा?&lt;br&gt;&lt;br&gt;क्या वोट के राजनीति देशमुख सरकार के डरावत बा?&lt;br&gt;&lt;br&gt;क्या वोट के राजनीति देश व देशवासियों के हित से बड़ बा?&lt;br&gt;&lt;br&gt;अगर अईसन बा त ई सरासर गलत बा. रऊआ का सोंचत बानी? व्यक्त  आपन विचारन के?&lt;br&gt;&lt;br&gt;राँची. ७ फरवरी -२००७&lt;br&gt;</description><pubDate>2/6/2008</pubDate></item><item><title>हम का करीं</title><author>abhay tripathi</author><link>http://www.bhojpatra.com/pathakrss.asp?a_id=253</link><description>चहलीं तऽ बहुत कि खुश रहीं हम,&lt;br&gt;लेकिन दिल ही दगा दे गइल त का करीं ?&lt;br&gt;लगावे चलनी खूबसूरत बाग.&lt;br&gt;लेकिन माली ही उजाड़ दिहलस तऽ हम का करीं ?&lt;br&gt;वक्त के आँधी बड़ा बेदर्दी बा,&lt;br&gt;जब नाखुदा ही डूबा दे तऽ हम का करीं ?&lt;br&gt;दिल तऽ आखिर दिल ही बा,&lt;br&gt;जब टूट ही गइल तऽ हम का करीं ?&lt;br&gt;&lt;br&gt;।।अभयकृष्ण।।&lt;br&gt;&lt;br&gt;</description><pubDate>10/11/2007</pubDate></item><item><title>मोको कहाँ ढूंढ़े रे बन्दे मैं तो तेरे पास में...</title><author>Binay Pandey</author><link>http://www.bhojpatra.com/pathakrss.asp?a_id=250</link><description>मोको कहाँ ढूंढ़े रे बन्दे मैं तो तेरे पास में...&lt;br&gt;&lt;br&gt;मोको कहाँ ढूंढ़ं रे बन्दे मैं तो तेरे पास में।&lt;br&gt;ना तीरथ में ना मूरत में, ना एकान्त निवास में।&lt;br&gt;ना मंदिर में ना मस्जिद में, ना काशी कैलाश में।&lt;br&gt;ना मैं जप मे ना मैं तप में, ना मैं व्रत उपवास में।&lt;br&gt;ना मैं क्रियाकर्म में रहता, ना ही योग सन्यास में।&lt;br&gt;नहिं प्राण में नहिं पिण्ड में, ना ब्रह्मांड आकाश में।&lt;br&gt;ना मैं भृकुटी भंवर गुफा में, सब श्वासन की श्वास में।ं,&lt;br&gt;खीजी होय तुरत मिल जा इस पल की तलाश में।&lt;br&gt;कहैं कबीर सुनो भाई साधो, मैं तो हूं विश्वास में ।&lt;br&gt;कबीर ..&lt;br&gt;</description><pubDate>8/6/2007</pubDate></item><item><title>सबसे बड़ा रुपइया</title><author>abhay tripathi</author><link>http://www.bhojpatra.com/pathakrss.asp?a_id=248</link><description>पइसा के खेला में भइया फँसल बा सब संसार,&lt;br&gt;रिश्ता नाता भूल गइल सब रुपया अपरमपार,&lt;br&gt;रुपया अपरमपार कमाये जब हम गईऽलीं,&lt;br&gt;धरम करम सब भूल के भइया बन गइलीं सरकार,&lt;br&gt;बन गइलीं सरकार के सबकर भाई कहइलीं,&lt;br&gt;रुपया के फेरा में आपन दीन ईमान गवइलीं,&lt;br&gt;कहै अभय कविराय कि जग के एक ही मइया,&lt;br&gt;दि होल थिंग इज दैट कि भइया सबसे बड़ा रुपइया।।&lt;br&gt;&lt;br&gt;।। अभयकृष्ण।।</description><pubDate>7/3/2007</pubDate></item><item><title>आजा आजा ए भोला हमार नगरी........।</title><author>abhay tripathi</author><link>http://www.bhojpatra.com/pathakrss.asp?a_id=246</link><description>आजा आजा ए भोला हमार नगरी,&lt;br&gt;तोहरा भंगिया खियाईब भरी गगरी।।&lt;br&gt;&lt;br&gt;पाप पुण्य के हाट लगल बा,&lt;br&gt;केहु राजा केहु रंक बनल बा।&lt;br&gt;नाही चाही एमा हमके तऽ कइनो गठरी&lt;br&gt;आजा आजा ए भोला हमार नगरी....।।&lt;br&gt;&lt;br&gt;सच्चाई दम तोड़ रहल बा,&lt;br&gt;झूठ के डमरू बाज रहल बा।&lt;br&gt;आऽईल कलजुग के घनघोर बदरी,&lt;br&gt;आजा आजा ए भोला हमार नगरी.....।।&lt;br&gt;&lt;br&gt;लोक लाज सब छूट गईल बा,&lt;br&gt;भ्रष्टाचार के अलख जगल बा।&lt;br&gt;नाही अईब तऽ लुट जाई काशी नगरी,&lt;br&gt;आजा आजा ए भोला हमार नगरी...।।&lt;br&gt;&lt;br&gt;दर्शन दुर्लभ ताज भईल बा,&lt;br&gt;सरकारी कारागार भईल बा।&lt;br&gt;नाही जईबे हम कबहु तोहार डगरी,&lt;br&gt;आजा आजा ए भोला हमार नगरी...।।&lt;br&gt;&lt;br&gt;आजा आजा ए भोला हमार नगरी,&lt;br&gt;तोहरा भंगिया खियाईब भरी गगरी।।&lt;br&gt;&lt;br&gt;।।अभयकृष्ण।।&lt;br&gt;</description><pubDate>6/21/2007</pubDate></item><item><title>दिल्ली के कउआ (लघुकथा)</title><author>singh rajnandan</author><link>http://www.bhojpatra.com/pathakrss.asp?a_id=242</link><description>किसुना कबूतर  अपना खोंता में दू गो बच्चा आ आपन मेहरारू का संगे चंपारण के चंपा वन में रहत रहे। खोंता के रखवारी आ बच्चा लोगिन के संगहिरा के भार कबुत्तरी गउरी पर रहे आ ओह सभ प्राणी खातिर दाना-पानी जुटावे के भार असगरे किसुना पर।&lt;br&gt;जिनगी के गाड़ी आराम से चलत रहे,पहिया के धुरी में कवनो महत्वकांक्षा के तेल भा चिकनाई के जरुरत कबो महसूश ना होखे।&lt;br&gt;मगर समय-परिस्थिति केहु खातिर कबो एक जइसन ना रहेला,राजा-रंक,साधु-फ़कीर हर केउ के समय अजमावेला।&lt;br&gt;हिमालय के नदियन में जब पानी भरे लागल त बिहार में भारी तबाही लेके बाढ़ आ गईल। किसान लोगिन के तइयार फसल,खेत-खरिहान आ सगरी धरती पानी में डूब गईल। लोग के घर-दुआर तक में पानी घुसि गईल त किसुना के भी दाना चुगे खातिर कवनो खाली धरती मिलल मुशकिल हो गईल। अब चार-चार जिउ खातिर दाना जुटावल किसुना पर भारी पड़े लागल।&lt;br&gt;सरकार के तरफ से पशु-पक्षी खातिर जे राहत आ सहायता राशन गिरावल जात रहे,ओह में से ज्यादा हिस्सा आदमीय लोग हड़प के खा जात रहे। बाँचल-खोंचल आकाश के शेर कहावेवाला चील,बाज़,गिद्ध,कउआ आदि लोग झपटि लेत रहे। कबूत्तर,पंड़ुगी जइसन चिरई लोगिन के त चील, बाज़ जइसन पक्षियन से जानो-माल के खतरा रहेला एह से सरकारी राशन का तरफ एह चिरई लोगिन के देखहु के हिम्मत &lt;br&gt;ना होखे। बड़ी मुसीबत,उपास आ बईठारी के समय आ गइल रहे।&lt;br&gt;किसुना के एगो उपाय सूझल। काहे ना अन्हरा वन के सेठ उल्लूक महाजन से कुछ दाना&lt;br&gt; आ रुपिया-पइसा सूद पर कारजा लेके बाल-बच्चा खातिर रखि दिहल जाव आ तवले बिहार से बाहर जहवाँ बाढ़-पानी के समसिया नइखे उहवाँ से दाना चुग के ले आवल जाव। आखिर ई समूचा भारत देश त अपने बा। कहवों से कहवों आवे-जाए,दाना-पानी कमाए के अख्तियार त भारत के सरकार समान रुप से सभनी के देलहीं बिया। आबहीं जाए में न तनी मेहनत परेशानी बा दाना त मिलीये जाई।&lt;br&gt;इहे सभ बात सोंच विचारि के किसुना अन्हरा वन के सेठ उल्लूक महाजन से दुगुना ब्याज पर कारजा लेके रखि देलस आ बाल-बच्चा के ध्यान राखे खातिर आपन मेहरारू के समुझा-बुझा के आपन कुछ साथी-संघाती का संगे दाना-पानी के जोगाड़ मे दिल्ली के तरफ उड़ गईल।&lt;br&gt;उड़ते-उड़ते जब नखलऊ(लखनऊ)से कुछ आगा चहुँपल त पशु-पक्षी के बोली,बात-वेवहार आ हवा-पानी में किसुना के अंतर बुझाए लागल। कुछ पशु-पक्षी लोग के एह बात पर एतराजो रहे कि किसुना बिहार के कबूत्तर होके दिल्ली का तरफ काहे उड़ रहल बा। एह बात पर सबसे ज्यादा परेशानी कउआ लोगिन के रहे। काँव-काँव!...काँव-काँव!...&lt;br&gt;दिल्ली पहुँचत-पहुँचत केतना कउआ किसुना आ ओकरा संघतिया लोगिन पर आपन चोंच अजमा दिहले रहे। खैर केहु तरे बिहार के कबूत्तर लोग दिल्ली चहुँपल।&lt;br&gt;दिल्ली पहुँचि के एह लोगिन के पता चलल कि अगर इंहवा रहे के बा त कउआ लोगिन से दबिये के रहे के पड़ी। खोंता किराया पर मिलि जाई, आगे दाना-पानी खातिर मेहनत-मजूरी आ अवसर के कवनो कमी नईखे। जेतना जादा मेहनत ओतना जादा दाना इंहवा जुटावल जा सकत बा। मगर कउआ लोगिन के काँव-काँव...  ... मजबुरी बा सहल जाई।&lt;br&gt;&lt;br&gt;दिल्ली से पहिले बिहार में किसुना एक से एक धूर्त,चल्हाँक आ करिया-भूरिया कउआ देखले रहे मगर दिल्ली के कउआ ओह सभ पर बीस पड़त रहे। दिल्ली में किसुना के एगो आउर नया बात मालुम भईल कि दुनिया के सभ कउआ के रंग करिये ना होखे बलुक कुछ कउअन के रंग पठानी गोर भी होखेला।&lt;br&gt;समय के साथ किसुना जब दिल्ली में रम-गम गईल, कुछ रुपिया-पइसा हाथ में आ गईल त उल्लूक सेठ के कारजा सधाके आपन मेहरारू,बच्चा सभनी के उड़ाके दिल्ली ले आइल। बचवन के नाम अंगरेजी इसकुल में लिखवा दिहल गइल आ सभे जनीं आराम से दिल्ली में रहे लागल। किसुना परिवार के देखि के दिल्ली के ढेर कउआ लोग काँव-काँव करे मगर बचवन सभ के पढे-लिखे, किसुना के दाना चुगे आ दिल्ली में एगो आपन खोंता किने से रोकल कवनो कउआ के कूवत भा वश में ना रहे।&lt;br&gt;&lt;br&gt;पाँच बरिस बीत गइल मगर किसुना के समुझ में ई बात ना आइल कि बिहार के कउआ सभ त खाली गीदड़,बिलाड,बिलाइ भा सँपनेउरीये के देखि के काँव-काँव करेला मगर ई दिल्ली के कउआ सभ कबूत्तर देखि के काहे चेंचिआला आ दुनिया के सभनी कबूत्तर के बिहारीये काहे बूझेला? आजुओ देखनीं ह दूगो यू.पी.वाला कबूत्तर के बच्चा इसकुल से लवटत देखि के पारक(पार्क)के बेंच पर बइठल दिल्ली के तीन-चार गो बूढ़ कउआ करत रहलें ह काँव-काँव!... काँव-काँव!...काँव..!!&lt;br&gt;बीच-बीच में हुँक्का के गुड़-गुड़ आ फेरु, काँव-काँव!... काँव-काँव!..काँव..&lt;br&gt;&lt;br&gt;-राजनन्दन&lt;br&gt;हांगजाऊ,चीन</description><pubDate>5/2/2007</pubDate></item><item><title> ईहे वादा बा</title><author>sanjay singh</author><link>http://www.bhojpatra.com/pathakrss.asp?a_id=241</link><description>   &lt;br&gt;     इहे वादा बा सबकर&lt;br&gt;      मिलजुल के रऽहब&lt;br&gt;      ना केहू से झगडा.&lt;br&gt;     ना  केहू से रगडा.&lt;br&gt;     ना केहू कऽ घर ऊजाडऽब&lt;br&gt;      ना केहू क करेजवा दुखाईब&lt;br&gt;      इहे वादा बा सबकर&lt;br&gt;      इहे वादा बा सबकर&lt;br&gt;&lt;br&gt;       ....  संजय सिंह ....&lt;br&gt;     </description><pubDate>5/2/2007</pubDate></item><item><title>आपन इंतजाम .......</title><author>Sudhanshu Kumar Tiwari</author><link>http://www.bhojpatra.com/pathakrss.asp?a_id=240</link><description>आज हम फिर से मुस्‍करा के बात कइनी ह .... &lt;br&gt;तहरा साथे वितावल हम घडी याद कइनी ह ... &lt;br&gt;चेहरा के काल्‍ह मुस्‍कराये खातिर औरी... &lt;br&gt;मन के पूरान दिन याद रहे के इंतजाम कइनी ह...&lt;br&gt;&lt;br&gt;आज फेर से पूरान बतियन में हेरा गईनी ह .. &lt;br&gt;आज फेर से पूरान याद में डूब गईनी ह ....... &lt;br&gt;हमरा मालूम बा कि काल्‍हो भी इ बतिया &lt;br&gt;हमार सब संगतिया, हमरा जरूर याद आई&lt;br&gt;&lt;br&gt;आज फेरू हम मन्दिर गईनी ह ........ &lt;br&gt;पूजा कईनी ह, औरी परसादी भी चढौनी ह...... &lt;br&gt;आज के येह घनघोर कलयुग में भी ...... &lt;br&gt;भगवान के कृपा हमरा पर बनल रही&lt;br&gt;&lt;br&gt;आजकल गर्मी के आनन्‍द उठावत बानी &lt;br&gt;अमवा के बगइचा में पसीना सुखावत बानी&lt;br&gt;विधना के लेखा ह कि समय बदलबे करी ....&lt;br&gt;बरखा के सीजन भी समय पर अइबे करी ......&lt;br&gt;&lt;br&gt;हम हमेशा से मन लगा के काम करीले ...... &lt;br&gt;तय समय से पहिले पूरा भी करीले ....... &lt;br&gt;हमार इंतजाम पूरा बा काल्‍ही खातिर भी &lt;br&gt;चाहे देही में ताकत रही भा ना रही .............&lt;br&gt;&lt;br&gt;आज फिर से हम सूते जातानी ......... &lt;br&gt;आज कौनो निमन सपना देखब ...&lt;br&gt;अगली पीढी के सपना सौपेके बा .......&lt;br&gt;काहे से कि...काल्‍ह ओके पूरा करेके बा ...... </description><pubDate>4/28/2007</pubDate></item></channel></rss>