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भोजपत्र :: यूनिकोड देवनागरी आधारित भोजपुरी विषय-वस्तु प्रबन्धन तन्त्र :: "मैं भगवान के हाथ की छोटी सी लेखिनी हूँ. जिसके द्वारा वो दुनिया को प्रेम संदेश लिख रहे हैं." - मदर टरेसा
= वन्दे मातरम् =
तोरण द्वार
+ राउर स्वागत बा +
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भोजपत्र :: तोरण द्वार ::
मत देख
नाता
तु साँझ के रंग में आवेलु
सबकरा के लघुवी से पानी पियावे चाह रहल बानी..
हमरे अँखिया फुटल बा केहु के पहचान नइखीं पावत..
जिनिगी पहाड़ जइसन लागे कबो-कबो - मनोज भावुक
गीत कहीं या गजल - अभयकृष्ण
दीप जरावल जाये
दिल्ली के कउआ (लघुकथा) - राजनन्दन
निर्मला भाग-१ (ख) - अभयकृष्ण
साखियाँ - कबीरदास.
भावुक के दोहे
मलूक दास के दोहे
कबीर के दोहे
रामायण के कुछ चौपाई.
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में - कबीर
रे दिल गाफिल गफलत मत कर - कबीर
मोको कहाँ ढूंढ़े रे बन्दे - कबीर
डोले बसन्ती बयार
परभु कृष्णा के भजन
झीनी रे झीनी बीनी चदरिया - कबीर
आजा आजा ए भोला हमार नगरी - अभयकृष्ण
आजा आजा ए भोला हमार नगरी
इक दिनवा पछतऽईबऽऽ हो मोरे मनवा
नाम त धूरुत नेतवो कमाला - राजनन्दन
मरला बिना स्वर्ग ना मिली।।
बाँग देत मुरगा नरियाय
चिचिरी के हाल : तस्वीर जिन्दगी के
युवा गीत ए.पी.जे. अब्दुल कलाम रचित
वन्दे मातरम् के भोजपुरी अनुवाद - राजनन्दन
कुणाल सिंह से मनोज भावुक के बात चीत
राकेश पाण्डेय से मनोज भावुक के बात-चीत
सुजीत कुमार से मनोज भावुक के बात-चीत
हमरा चान लागे लू
अबकी आवे अइसन नयका साल
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अफ्रिका में भोजपुरी - मनोज भावुक
राज ठाकरे के पागलपन.
जय थावेवाली माई की !
करम
एक चिट्ठी भोजपुरिया बच्चा लोगिन के नाम
बली प्रथा - एगो घोर पाप
मनोज भावुक पुरस्कार लेते हुए.
दुर्गा पुजा २००६ . मेकन राँची।
संपादक के नाम पत्र - राजनन्दन. हांगजाऊ
अभियन्ता दिवस - १५ सितम्बर
भोजपत्र देवनागरी क्या है ?
जनकवि कैलाश गौतम - हिन्दी-भोजपुरी के सुप्रसिद्ध
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